दून विश्वविद्यालय में EBSCO डेटाबेस एवं एआई आधारित शोध पर कार्यशाला का आयोजन

दून विश्वविद्यालय में EBSCO डेटाबेस एवं एआई आधारित शोध पर कार्यशाला का आयोजन
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देहरादून, 20 फरवरी 2026: दून विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय द्वारा स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के सहयोग से आज EBSCO डेटाबेस के प्रभावी उपयोग विषय पर शोधार्थियों एवं एमबीए विद्यार्थियों के लिए एक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को उन्नत शोध उपकरणों से परिचित कराना तथा शैक्षणिक शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका के प्रति जागरूक करना था।

कार्यशाला का संचालन EBSCO Information Services के वरिष्ठ प्रशिक्षण प्रबंधक श्री ऋतिश कुमार झा द्वारा किया गया। उन्होंने अपने विस्तृत एवं रोचक प्रस्तुतीकरण में खोज तकनीकों, जर्नलों की पहचान तथा गुणवत्तापूर्ण शोध लेख प्रकाशित करने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि AI किस प्रकार शैक्षणिक खोज प्रणाली को परिवर्तित कर रही है, जिससे अधिक सटीक, त्वरित एवं व्यक्तिगत शोध परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

श्री झा ने यह भी समझाया कि AI आधारित उपकरण शोध प्रक्रिया को किस प्रकार सुगम बनाते हैं, जैसे साहित्य समीक्षा को व्यवस्थित करना, शोध के नए आयामों की पहचान करना तथा विश्लेषण करना। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यवसायिक संस्थानों के विभिन्न अध्ययन उदाहरणों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया कि AI समर्थित शोध उपकरण रणनीतिक निर्णय-निर्माण और व्यावसायिक विश्लेषण में किस प्रकार सहायक सिद्ध हो रहे हैं। उनके व्यावहारिक उदाहरणों ने शैक्षणिक शोध और उद्योग जगत के बीच संबंध को स्पष्ट किया।

कार्यशाला में शोधार्थियों एवं एमबीए विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और एआई आधारित खोज प्रणाली के उपयोग तथा इसके नैतिक पहलुओं को समझने में गहरी रुचि दिखाई। संवादात्मक सत्र के दौरान शोध प्रकाशन प्रक्रिया, मौलिकता और एआई के संतुलित एवं नैतिक उपयोग पर भी चर्चा हुई।

इस अवसर पर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो. गजेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक एवं कॉर्पोरेट परिवेश में प्रामाणिक एवं उच्च गुणवत्ता वाले शोध डेटाबेस तक पहुँच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन के विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ डिजिटल दक्षता भी विकसित करनी चाहिए, जिससे वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें। उन्होंने केंद्रीय पुस्तकालय की इस पहल की सराहना की।

विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डिजिटल युग में पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वे ज्ञान, तकनीक और नवाचार के सशक्त केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को एआई उपकरणों का उपयोग जिम्मेदारी एवं नैतिकता के साथ करने की प्रेरणा दी तथा कहा कि मौलिक चिंतन और अकादमिक ईमानदारी ही शोध की आधारशिला है।

कार्यक्रम समन्वयक एवं डॉ. राजनीश कुमार ने कार्यशाला के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि ई-संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए नियमित उन्मुखीकरण कार्यक्रम आवश्यक हैं।

इस अवसर पर सह-आचार्य डॉ. आशीष सिन्हा एवं उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. उदिता नेगी भी उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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