दून अस्पताल में अस्थि विशेषज्ञ डॉ. अनिल जोशी ने एंडोबटन तकनीक से किया सफल ऑपरेशन
*दून अस्पताल की व्यवस्थाओं में दिखा सुधार, फाउंडेशन पदाधिकारियों ने जताई संतुष्टि, व्यवस्थाओं में और सुधार की रखी मांग*
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित ऐतिहासिक एवं बहुप्रसिद्ध दून अस्पताल, जहां आम जनता को विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा उन्नत तकनीकों से उपचार उपलब्ध कराया जाता है, एक बार फिर चर्चा में है। बीते 16 मई 2025 को रानीखेत रोड, डंगवाल बिल्डिंग, रामनगर के समीप, 74 वर्षीय पूर्व सैनिक एवं सर्वोदयी जनकल्याण फाउंडेशन के प्रदेश संयोजक जी.एस. बिष्ट सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। स्कूटर से जा रहे बिष्ट को एक थ्री-व्हीलर ऑटो चालक ने लापरवाही पूर्वक सवारी बुलाते समय बिना देखे टक्कर मार दी, जिससे बिष्ट गिरकर घायल हो गए और उनकी कंधे की प्रमुख हड्डी (शोल्डर बोन) टूट गई।
रामनगर संयुक्त चिकित्सालय में एंडोबटन तकनीक उपलब्ध न होने के चलते बिष्ट को देहरादून स्थित दून अस्पताल रेफर किया गया। यहां अस्थि रोग विभाग के प्रमुख, डॉ. अनिल जोशी (भड़कटिया, पिथौरागढ़ के मूल निवासी) ने शोधकर्ता चिकित्सकों की उपस्थिति में एंडोबटन तकनीक के माध्यम से सफल ऑपरेशन किया। डॉ. जोशी ने बताया कि इस अत्याधुनिक तकनीक में केवल एक छोटा सा चीरा लगाया जाता है और मरीज को एक सप्ताह के भीतर छुट्टी दी जा सकती है। उल्लेखनीय है कि डॉ. अनिल जोशी की पत्नी, डॉ. चित्रा जोशी, दून अस्पताल में गायनी विभाग की एचओडी हैं।
चोटिल बिष्ट से मिलने पहुंचे सर्वोदयी फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिंह रावत, उपाध्यक्ष (Ex. मेजर) डॉ. बी.एस. बिष्ट, महामंत्री (Ex. प्रोफेसर) गोविंद बिष्ट, संरक्षक धीरज नेगी, बी.एस. नेगी, आनंद रावत, शेखर नेगी एवं अन्य पदाधिकारियों ने दून अस्पताल में हो रहे सकारात्मक बदलावों को देखकर खुशी जताई। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के प्रयासों की सराहना की।
फाउंडेशन पदाधिकारियों ने दून अस्पताल परिसर में अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण, नए भवनों के निर्माण, पर्याप्त दवाओं, सफाई व्यवस्था, प्रशासनिक प्रबंधन और डॉक्टरों की उपलब्धता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पुरानी बिल्डिंग की पहली मंजिल पर वर्षों से बंद पड़े वाटर फ्रीजर, प्राइवेट रूम्स के टीबी/एसी, और मरीजों के भोजन की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता है।
चोटिल संयोजक बिष्ट ने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर्स और अस्पताल प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार पर की जा रही सख्त कार्रवाई सराहनीय है। उन्होंने कहा कि “भय बिन होत न प्रीति” के सिद्धांत को अपनाते हुए भ्रष्टाचार के विरुद्ध और कठोर कदम उठाए जाने की जरूरत है। साथ ही, दून अस्पताल की व्यवस्थाओं में और सुधार के लिए शीघ्र ही शासन/प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा और आवश्यक वार्ताएं की जाएंगी।
