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25 साल बाद भी सड़क से वंचित तिमूरी गांव, बदहाल संपर्क मार्ग से पलायन और परेशानी बढ़ी

25 साल बाद भी सड़क से वंचित तिमूरी गांव, बदहाल संपर्क मार्ग से पलायन और परेशानी बढ़ी
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी विकासखंड भैसियाछाना की खाकरी ग्राम सभा के तिमूरी गांव तक सड़क नहीं पहुंच सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कषाण बैंड से अगेरा-तिमूरी सड़क मार्ग को वर्षों पहले स्वीकृति मिलने के बावजूद यह परियोजना आज तक विभागीय फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई।

ग्रामीणों का कहना है कि आज भी उन्हें बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए दुर्गम पैदल पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के मौसम में इन रास्तों पर आवाजाही करना जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

रीठागाड़ी दगड़ियों संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रताप सिंह नेगी ने बताया कि केवल तिमूरी गांव ही नहीं, बल्कि पूरे रीठागाड़ क्षेत्र के कई गांव सड़क, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन सड़क निर्माण के केवल आश्वासन ही मिले, धरातल पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा के अभाव में क्षेत्र से लगातार पलायन बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से लंबे समय से लंबित कषाण बैंड–अगेरा–तिमूरी सड़क मार्ग का निर्माण शीघ्र शुरू कर क्षेत्र के लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

देवभूमि खबर

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