न्यूरोएनेस्थीसिया और न्यूरोक्रिटिकल केयर की आधुनिक तकनीकों पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

देहरादून। उत्तराखंड सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (UKSA) की ओर से इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (ISA) के राष्ट्रीय प्रायोजन तथा Max Super Speciality Hospital, देहरादून के सहयोग से न्यूरोएनेस्थीसिया एवं न्यूरोक्रिटिकल केयर के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर राष्ट्रीय स्तर की CME का आयोजन Hotel Hyatt Centric, देहरादून में किया गया। कार्यक्रम की मेजबानी ISA देहरादून सिटी शाखा ने की।
CME का मुख्य विषय “न्यूरोएनेस्थीसिया एवं न्यूरोक्रिटिकल केयर में नवीनतम तकनीकें एवं आधुनिक विकास” रहा। कार्यक्रम में न्यूरोएनेस्थीसिया, न्यूरोक्रिटिकल केयर तथा न्यूरोसर्जिकल मरीजों के आधुनिक उपचार एवं प्रबंधन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। साथ ही चिकित्सकों के बीच संवादात्मक सत्र और विचार-विमर्श भी हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ISA National के अध्यक्ष डॉ. नवीन मल्होत्रा रहे। ISA National के सचिव डॉ. राजीव गुप्ता तथा कोषाध्यक्ष डॉ. सुनील सेठी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर Max Institute of Neurosciences के Emeritus Consultant डॉ. ए.के. सिंह तथा Max Dehradun के Executive Vice President एवं Unit Head, Hospital Operations डॉ. संदीप तंवर सहित डॉ. पारुल, GC Coordinator ने चिकित्सकों को संबोधित किया।
CME में देहरादून समेत उत्तराखंड के विभिन्न शहरों के अलावा दिल्ली और लुधियाना से लगभग 110 चिकित्सक प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। विशेषज्ञों ने न्यूरोसर्जिकल मरीजों के बेहतर प्रबंधन, आधुनिक एनेस्थीसिया तकनीकों और न्यूरोक्रिटिकल केयर में हो रही प्रगति से संबंधित जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. मीनल चौहान, डॉ. रोबिना मक्कर और डॉ. मुदित गर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में डॉ. तनवीर, डॉ. कपिल, डॉ. समीर, डॉ. कुशांत, डॉ. अतुल और डॉ. प्रितिश समेत अनेक चिकित्सक मौजूद रहे।
आयोजकों ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान तेजी से विकसित हो रहा है। ऐसे वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सकों को उपचार की नवीनतम तकनीकों और प्रक्रियाओं से लगातार अपडेट रखने में सहायक होते हैं। इससे गंभीर एवं न्यूरोसर्जिकल मरीजों को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम का समापन विशेषज्ञों के अनुभवों के आदान-प्रदान, ज्ञानवर्धक वैज्ञानिक चर्चा तथा भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने के संकल्प के साथ हुआ।
