हरिद्वार में इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना को गति देने के निर्देश, 75 करोड़ प्रति किमी लागत पर हुई समीक्षा
देहरादून। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने सचिवालय में हरिद्वार शहर में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में परियोजना के क्रियान्वयन, लागत, भूमि हस्तांतरण, कन्सेशन अवधि और वित्तीय व्यवहार्यता पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा ने परियोजना का प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि इसका क्रियान्वयन पीपीपी मॉडल के अंतर्गत डीबीएफओटी आधार पर किया जाएगा। प्रस्तुतीकरण में संभावित मार्ग, निर्माण कार्य और संचालन व्यवस्था की जानकारी साझा की गई।
अधिकारियों के अनुसार, परियोजना से हरिद्वार में यातायात व्यवस्था सुगम होगी और श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी। निर्माण कार्य की अनुमानित लागत लगभग 75 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर आंकी गई है, जबकि भूमि, स्टेशन और अन्य व्यवस्थाएं अलग से शामिल होंगी।
बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि प्रस्तावित रोपवे स्टेशन हेतु आवश्यक भूमि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के स्वामित्व में है। इस पर सचिव आवास ने निर्देश दिए कि उत्तराखंड सरकार की ओर से पुनः पत्राचार कर उक्त भूमि को 99 वर्षों की लीज पर 1 रुपये प्रतिवर्ष की दर से हस्तांतरित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
परियोजना की कन्सेशन अवधि, जो वर्तमान में 30 वर्ष प्रस्तावित है, पर भी समीक्षा की गई। सचिव आवास ने सुझाव दिया कि उच्च लागत को देखते हुए अतिरिक्त 30 वर्ष तक विस्तार का प्रावधान रखा जाए, जिसे 15-15 वर्ष के दो चरणों में लागू किया जा सके। इससे वित्तीय व्यवहार्यता मजबूत होगी और निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
सचिव आवास ने निर्देश दिए कि परियोजना को डीपीआर स्तर पर अनुमोदित कर ईएफसी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए तथा सभी तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूर्ण की जाएं। उन्होंने विभागों के बीच समन्वय बढ़ाकर परियोजना को शीघ्र धरातल पर उतारने पर जोर दिया।

