शासकीय कार्य, समाजसेवा और साहित्य-सृजन के संगम से बने ‘कर्मयोगी’ डॉ. अशोक कुमार मिश्र ‘क्षितिज’

देहरादून। उत्तराखंड सचिवालय में सेवारत डॉ. अशोक कुमार मिश्र ‘क्षितिज’ ने शासकीय दायित्वों के साथ समाजसेवा, शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ‘मिशन कर्मयोगी’ कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 180 प्रमाण पत्र अर्जित करने की उपलब्धि पर उन्हें उत्तराखंड सचिवालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन श्री आनंद बर्धन ने सम्मानित किया।
डॉ. मिश्र की बहुआयामी प्रतिभा का परिचय उस समय भी देखने को मिला, जब ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अभियान के तहत लोक भवन, देहरादून में आयोजित उत्तर प्रदेश दिवस कार्यक्रम में उन्होंने अपने स्वरचित गीत ‘देवभूमि उत्तराखंड मेरी जान है, मेरी वीरभूमि स्वर्ग से महान है’ को अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उपस्थित राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, विधायक सविता कपूर सहित वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने गीत की सराहना की। राज्यपाल ने भी डॉ. मिश्र के गीत के भाव और उनके गायन की प्रशंसा करते हुए शुभकामनाएं दीं।
शासकीय कार्यों की व्यस्तता के बावजूद डॉ. मिश्र जरूरतमंदों के बीच समय निकालकर सेवा कार्यों में जुटे रहते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निःशुल्क पढ़ाने, युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मार्गदर्शन देने और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण देने जैसे कार्यों में उनका योगदान उल्लेखनीय है।
वे सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, शिक्षकों को नवाचारी एवं विश्वस्तरीय शिक्षण गतिविधियों के लिए प्रेरित करने, युवाओं को कौशल विकास एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने तथा जल संरक्षण, सड़क सुरक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण जागरूकता और गंगा प्रदूषण मुक्ति जैसे अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
समाजसेवा और शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डॉ. मिश्र ने ‘अभ्युदय वात्सलयम’ नामक गैर-सरकारी संगठन की स्थापना की है। संस्था वंचित वर्ग, माताओं और बच्चों के कल्याण के साथ शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित कर रही है। उत्तराखंड में सरकारी शिक्षा की बेहतरी को लेकर संस्था द्वारा राष्ट्रीय स्तर के आयोजन भी किए गए हैं, जिनमें विभिन्न राज्यों के शिक्षाविद्, प्रबुद्धजन और नवाचारी शिक्षक शामिल हुए।
डॉ. मिश्र का मानना है कि किसी बच्चे, युवा या मातृशक्ति के चेहरे पर उनके छोटे से प्रयास से आने वाली खुशी और संतोष ही उन्हें निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।
साहित्य और संस्कृति से बचपन से जुड़े डॉ. मिश्र नियमित रूप से साहित्य सृजन करते हैं। उनके अब तक पांच कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं—‘मैं चुप हूं’, ‘अंतहीन चुप्पी’, ‘उनसे कहना है’, ‘पूंछ कटी छिपकली’ और ‘फुटपाथ का आदमी’। एक अन्य कविता संग्रह और एक आंचलिक उपन्यास प्रकाशनाधीन है। उनका कविता संग्रह ‘फुटपाथ का आदमी’ पाठकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय रहा है और इसे बेस्टसेलर पुस्तकों में भी स्थान मिला है।
डॉ. मिश्र गंगा बचाओ अभियान से भी जुड़े रहे हैं और ‘मां गंगा की पुकार’ नामक वीडियो एलबम का हिस्सा रहे हैं।
डॉ. अशोक कुमार मिश्र ‘क्षितिज’ हिन्दी, भोजपुरी और पहाड़ी भाषाओं में स्वरचित गीत लिखने और उन्हें गाने में भी रुचि रखते हैं। उनके लिखे और गाए भोजपुरी एवं पहाड़ी गीत सोशल मीडिया और यूट्यूब पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। भोजपुरी गीत ‘चेहरा गुलाब सा’ और पलायन की पीड़ा को अभिव्यक्त करता पहाड़ी गीत ‘पहाड़ा तू नी छोड़’ विशेष रूप से सराहे जा रहे हैं।
शासकीय सेवा, समाजसेवा, शिक्षा, साहित्य, संगीत और संस्कृति—इन सभी क्षेत्रों में निरंतर सक्रिय रहकर डॉ. अशोक कुमार मिश्र ‘क्षितिज’ ने यह साबित किया है कि पद केवल जिम्मेदारी देता है, लेकिन कर्म और संवेदनशीलता ही व्यक्ति को समाज के लिए उदाहरण बनाती है।
