शैक्षिक संस्थानों पर लेबर सैस या भवन कर?-जन संघर्ष मोर्चा ने उठाए सवाल
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह ने सरकार पर तुगलकी फरमान जारी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा निजी विद्यालयों के प्रबंधन को विद्यालय भवन की लागत का एक फ़ीसदी लेबर सैस (श्रम उपकर) जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में कई विद्यालयों को नोटिस भी जारी किए गए हैं।
नेगी ने कहा कि सैस की गणना भवन निर्माण में वास्तविक लेबर लागत के आधार पर होनी चाहिए थी, लेकिन वर्तमान में इसे भवन की कुल लागत के आधार पर तय किया जा रहा है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई भवन 1000 रुपये में बना है और उसमें 150 रुपये लेबर लागत आई है, तो लेबर लागत पर 1 फ़ीसदी यानी 1.50 रुपये सैस लगाना न्यायोचित होता। लेकिन मौजूदा व्यवस्था में भवन की कुल लागत पर 1 फ़ीसदी यानी 10 रुपये वसूला जा रहा है। यह लेबर सैस न होकर भवन कर जैसा प्रतीत हो रहा है।
उन्होंने कहा कि यह कर अप्रत्यक्ष रूप से छात्रों और उनके अभिभावकों पर बोझ डालेगा और शिक्षा को महंगा बना देगा। भविष्य में यह तथाकथित “जजिया कर” बच्चों के लिए शिक्षा ग्रहण करना कठिन कर सकता है। अस्पतालों और अन्य संस्थाओं से भी इसी प्रकार कर वसूले जाने की सूचना मिली है।
मोर्चा का कहना है कि सरकार का यह निर्णय जनता पर टैक्स पर टैक्स थोपकर बोझ डालने जैसा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मुद्दे को लेकर जन संघर्ष मोर्चा शीघ्र ही सीएम दरबार में दस्तक देगा और थोपे गए जजिया कर में संशोधन की मांग करेगा।

