
देहरादून।दून विश्वविद्यालय के डॉ. नित्यानंद हिमालयन शोध एवं अध्ययन केंद्र द्वारा हिमालय ऋषि डॉक्टर नित्यानंद की जन्म जयंती पर हिमालय और उत्तराखंड से जुड़े विभिन्न विषयों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने बताया कि इस वर्ष डॉ. नित्यानंद जी की जन्म जयंती विशेष है क्योंकि इस वर्ष वे शतायु पूर्ण कर रहे हैं। इसलिए उनकी शताब्दी वर्ष पर संचालित होने वाले कार्यक्रमों का शुभारंभ 9 फरवरी को विश्वविद्यालय के डॉ. नित्यानंद सभागार में राज्य के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। उद्घाटन सत्र में डॉ. नित्यानंद जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को जानने वाले विशेषज्ञ एवं शिक्षाविद् उनके दर्शन के साथ ही उनके दृष्टिकोण में हिमालय और उत्तराखंड पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
कुलपति ने बताया कि उद्घाटन सत्र में मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य डॉ. कमलेश कुमार, उत्तरांचल उत्थान परिषद के संरक्षक श्री प्रेम बड़ाकोटी, सांसद श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत एवं विधायक श्री विनोद चमोली आदि का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
इस संगोष्ठी में भूगोल, भूगर्भ, हिमालय, जलवायु, पर्यावरण, अर्थिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, कृषि एवं जल संसाधन जैसे विभिन्न विषयों पर जुड़े विशेषज्ञ दो दिनों तक मंथन करेंगे। उद्घाटन सत्र के दौरान हिमालय के संरक्षण के लिए कार्य करने वाले दो विभूतियों को मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान पिछले वर्ष जल स्रोतों के संरक्षण पर कार्य करने वाले श्री सच्चिदानंद भारती और वृक्षारोपण की पहल को संस्कारों में पिरोने वाले मैती आंदोलन के प्रणेता पद्मश्री कल्याण सिंह को दिया जा चुका है।
प्रो. डंगवाल ने बताया कि उद्घाटन सत्र के पश्चात परिचर्चा सत्र में डॉ. नित्यानंद जी की दृष्टि में हिमालय, जीवन पद्धति, कला, संस्कृति, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि विषयों पर डॉ. सुभाष कुलश्रेष्ठ, डॉ. विष्णु प्रसाद सेमवाल, डॉ. जनार्दन और डॉ. शिवेन कश्यप प्रतिभाग करेंगे। इस सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर आर.पी. ममंगाई करेंगे तथा सह-अध्यक्ष प्रो. एस.एस. सुथार होंगे। परिचर्चा का संचालन सुप्रसिद्ध भूगर्भ वैज्ञानिक यशपाल सुन्दरियाल करेंगे।
इसी तरह दो दिनों तक विभिन्न तकनीकी सत्रों में वैज्ञानिक एवं शोधार्थी मंथन करेंगे, फरवरी 10 तारीख को संगोष्ठी का समापन होगा।

