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एनएसईएल मामले में निवेशकों को राहत की राह खुली, 3,464 करोड़ की कुर्क संपत्तियों के मुद्रीकरण को मंजूरी

एनएसईएल मामले में निवेशकों को राहत की राह खुली, 3,464 करोड़ की कुर्क संपत्तियों के मुद्रीकरण को मंजूरी
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मुंबई। राष्ट्रीय स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) मामले में निवेशकों को धनराशि वापस दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुंबई की धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत ने 8 अक्टूबर 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कुर्क की गई करीब 3,464 करोड़ रुपये की संपत्तियों के मुद्रीकरण की अनुमति दे दी। इन संपत्तियों से प्राप्त राशि में से पहले चरण में 1,950 करोड़ रुपये का उपयोग निवेशकों के एकमुश्त समझौता भुगतान के लिए किया जाएगा। यह समझौता राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी), मुंबई से स्वीकृत योजना के तहत किया गया है।

विशेष अदालत ने पीएमएलए विशेष वाद संख्या 4/2015 में विविध आवेदन संख्या 169/2026 पर यह आदेश पारित किया। योजना के अनुसार, निर्धारित शर्त पूरी होने के बाद संपत्तियों के मुद्रीकरण से प्राप्त अधिकतम 1,950 करोड़ रुपये 63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को दिए जाएंगे। कंपनी निर्दिष्ट निवेशक लेनदारों की ओर से यह राशि प्राप्त करेगी। इस व्यवस्था के तहत 5,682 पात्र निवेशकों को भुगतान किया जाना है।

13 साल से भुगतान का इंतजार कर रहे निवेशक

एनएसईएल में वर्ष 2013 के भुगतान संकट से हजारों निवेशक प्रभावित हुए थे। मामले में करीब 13 हजार निवेशकों की लगभग 5,600 करोड़ रुपये की बकाया राशि का उल्लेख किया गया था। आरोप था कि वास्तविक वस्तु भंडार उपलब्ध नहीं होने के बावजूद एक्सचेंज के मंच पर जिंसों के कारोबार की अनुमति दी गई, जिसके बाद भुगतान में चूक हुई।

इस मामले में वर्ष 2013 में मुंबई के एमआरए मार्ग पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में जांच मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी गई। प्राथमिकी में मंच संचालक, उसके निदेशकों और प्रमुख अधिकारियों, भुगतान में चूक करने वाले 25 सदस्यों तथा अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और जालसाजी जैसे आरोप लगाए गए थे।

ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू की। अब तक एजेंसी ने 35 अनंतिम कुर्की आदेश जारी कर लगभग 3,464.03 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। इस मामले में विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायतें और पूरक शिकायतें भी दाखिल की गई हैं।

एनसीएलटी की योजना को मिली न्यायिक मंजूरी

एनसीएलटी, मुंबई ने 28 नवंबर 2025 को कंपनी अधिनियम, 2013 की धाराओं 230 से 232 के तहत समझौता योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के अंतर्गत 5,682 निर्दिष्ट लेनदारों के लिए 1,950 करोड़ रुपये के एकमुश्त भुगतान का प्रावधान है। ईडी के अनुसार, 92 प्रतिशत से अधिक लेनदारों ने इस योजना को मंजूरी दी थी। योजना के तहत प्रत्येक पात्र निवेशक को उसके सत्यापित दावे की कम से कम लगभग 42 प्रतिशत राशि मिलने का प्रावधान है।

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण ने 15 जनवरी 2026 को योजना की मंजूरी के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में दी गई चुनौती भी खारिज कर दी गई। 13 अप्रैल 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने सभी संबंधित अदालतों और प्राधिकरणों को योजना लागू करने के लिए शीघ्र उचित आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे, ताकि पात्र निवेशकों को भुगतान किया जा सके।

महाराष्ट्र के कानून के तहत कुर्क संपत्तियों पर भी होगा समन्वय

ईडी के अनुसार, कुर्क की गई कई संपत्तियां महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण अधिनियम, 1999 के तहत भी कुर्क हैं। इसलिए संपत्तियों के मुद्रीकरण की प्रक्रिया महाराष्ट्र अधिनियम के तहत नियुक्त सक्षम प्राधिकारी से परामर्श करके पूरी की जाएगी। निवेशकों को जल्द धनराशि वापस दिलाने के उद्देश्य से ईडी ने इस व्यवस्था पर अनापत्ति भी दी है।

विशेष अदालत के आदेश के अनुसार, संपत्तियों के मुद्रीकरण से प्राप्त 1,950 करोड़ रुपये से अधिक की कोई भी राशि अदालत के पास सुरक्षित रहेगी। अतिरिक्त राशि के संबंध में अंतिम निर्णय मामले की आगे की न्यायिक कार्यवाही के परिणाम के अधीन होगा।

पहले भी निवेशकों को धनराशि लौटाने की पहल

ईडी ने बताया कि इस मामले में निवेशकों को धनराशि लौटाने की दिशा में पहले भी कदम उठाए गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रदीप नंद्राजोग की अध्यक्षता वाली समिति के निर्देश पर ईडी ने टिम्बर ट्रेल ट्रैवल टुडे प्राइवेट लिमिटेड के शेयर और उनसे अर्जित लाभ, जिनका मूल्य करीब 17.47 करोड़ रुपये था, निवेशकों में वितरण के लिए समिति के समक्ष प्रस्तुत किए थे।

ईडी के अनुसार, कुर्क संपत्तियों के मुद्रीकरण का वर्तमान आदेश निवेशकों को पहले चरण में 1,950 करोड़ रुपये लौटाने का रास्ता तैयार करता है। शेष राशि और उसके वितरण के संबंध में आगे की कार्रवाई विशेष अदालत के निर्णय के अनुसार होगी। एजेंसी ने कहा कि वह वित्तीय अपराध से जुड़ी संपत्तियों की पहचान, धनशोधन की जांच और कानून के अनुसार पात्र निवेशकों को धनराशि वापस दिलाने के लिए कार्रवाई जारी रखेगी।

देवभूमि खबर

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