छत्तीसगढ़ कस्टम राइस मिलिंग घोटाला: राम गोपाल अग्रवाल गिरफ्तार, ईडी को पांच दिन की हिरासत

धान मिलरों से करीब 147 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का आरोप, प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले प्रति क्विंटल 20 रुपये लेने का खुलासा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कस्टम राइस मिलिंग घोटाले की जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राम गोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। ईडी के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने नौ अक्टूबर 2026 को धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 19 के तहत यह कार्रवाई की। रायपुर की विशेष अदालत ने आरोपी को पूछताछ के लिए पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।
यह मामला धान मिलरों से कस्टम राइस मिलिंग के प्रोत्साहन भुगतान के बदले कथित तौर पर करीब 147 करोड़ रुपये की अवैध वसूली से जुड़ा है। ईडी की जांच के अनुसार, इस वसूली में छत्तीसगढ़ राज्य राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और मार्कफेड के अधिकारियों से जुड़े एक कथित गठजोड़ की भूमिका सामने आई है।
प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले वसूली का आरोप
ईडी के मुताबिक, खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 के लिए कस्टम राइस मिलिंग की विशेष प्रोत्साहन राशि 40 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई थी। इसके बाद कथित तौर पर धान मिलरों से प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले प्रति क्विंटल 20 रुपये नकद वसूले जाने लगे। आरोप है कि जिन मिलरों ने अवैध रकम देने से इनकार किया, उनके बिल जानबूझकर रोक दिए गए।
जांच एजेंसी के अनुसार, दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच इस तरीके से करीब 147 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई। ईडी ने इस रकम को धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत अपराध से अर्जित आय माना है।
वसूली की व्यवस्था संचालित करने में अहम भूमिका का आरोप
ईडी की जांच में सामने आया कि राम गोपाल अग्रवाल ने कथित तौर पर मिलरों से नकदी वसूली की व्यवस्था बनाने, उसकी निगरानी करने और उसे नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी के अनुसार, वह राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के माध्यम से अवैध भुगतान वसूलने के निर्देश पहुंचाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि विभिन्न जिलों से एकत्र की गई नकदी की जानकारी एसोसिएशन के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर को दी जाती थी। आरोप है कि रोशन चंद्राकर नियमित रूप से जिलेवार वसूली का विवरण राम गोपाल अग्रवाल को सत्यापन के लिए उपलब्ध कराते थे। इसके बाद कथित तौर पर अवैध रूप से एकत्र की गई नकदी उन व्यक्तियों तक पहुंचाई जाती थी, जिन्हें अग्रवाल ने नामित किया था।
आयकर विभाग की शिकायत से शुरू हुई जांच
ईडी ने आयकर विभाग की ओर से भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दाखिल अभियोजन शिकायत के आधार पर जांच शुरू की थी। इसके बाद रायपुर के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने भी भारतीय दंड संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की।
ईडी के अनुसार, जांच के दौरान राम गोपाल अग्रवाल का रवैया टालमटोल वाला और असहयोगपूर्ण रहा। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने अवैध वसूली, नकदी के लेन-देन और अपराध से अर्जित आय के इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से पांच दिन की हिरासत मंजूर की गई।
ईडी मामले में कथित अवैध वसूली, नकदी के प्रवाह और उससे अर्जित संपत्तियों से जुड़े पहलुओं की आगे जांच कर रही है।


