नैनीताल के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को राजभाषा गौरव पुरस्कार, उत्तराखंड में खुशी की लहर
रिपोर्ट: ललित जोशी
नैनीताल। नैनीताल के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और कुमाऊं विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को केंद्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से नवी मुंबई में आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में प्रतिष्ठित राजभाषा गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. तिवारी को यह सम्मान उनकी पुस्तक ‘अतीत से वर्तमान तक : नैनीताल का सफर और गॉथिक राजभवन के निर्माण की अद्भुत गाथा’ के लिए प्रदान किया गया। उन्हें सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। उनके सम्मानित होने से नैनीताल समेत पूरे उत्तराखंड में खुशी की लहर है।
नवी मुंबई में पुरस्कार प्राप्त करने के बाद नैनीताल लौटे डॉ. गिरीश रंजन तिवारी ने जिला संवाददाता ललित जोशी से बातचीत में बताया कि इस वर्ष विभिन्न श्रेणियों में देशभर के 13 लेखकों को राजभाषा गौरव पुरस्कार प्रदान किया गया। इनमें उत्तराखंड से यह सम्मान प्राप्त करने वाले वे एकमात्र लेखक तथा उत्तराखंड से सम्मानित होने वाले पहले पत्रकार हैं।
उनकी पुरस्कृत पुस्तक में नैनीताल के इतिहास, गॉथिक राजभवन के निर्माण, इसकी वास्तुकला तथा नगर के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास का विस्तृत और शोधपरक वर्णन किया गया है। पुस्तक के माध्यम से नैनीताल की ऐतिहासिक विरासत और महत्वपूर्ण धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
डॉ. तिवारी को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बंडी संजय कुमार ने पुरस्कार प्रदान किया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं सुनेत्रा पवार, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बंडी संजय कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सम्मेलन का संचालन राजभाषा विभाग की सचिव अंशुली आर्या ने किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए हिंदी लेखन और हिंदी के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिंदी को समृद्ध बनाने और भारतीय भाषाओं के शब्दों को हिंदी से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।
देहरादून। डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को राजभाषा गौरव पुरस्कार मिलने पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि ज्ञान, विरासत और इतिहास को शब्दों में सहेजकर उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उत्तराखंड की गौरवशाली विरासत और ऐतिहासिक धरोहर को देशभर में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
डॉ. गिरीश रंजन तिवारी हिंदी लेखन, पत्रकारिता और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए अमेरिका, हंगरी और मॉरीशस स्थित भारतीय दूतावासों सहित थाईलैंड और सिंगापुर की प्रतिष्ठित संस्थाओं तथा विश्वविद्यालयों से भी सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने पत्रकारिता से संबंधित तीन पुस्तकों का लेखन किया है। इनमें से एक पुस्तक का विमोचन मॉरीशस के राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में किया था। उनके दो दर्जन से अधिक शोध पत्र और एक हजार से अधिक लेख प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें उत्तराखंड रत्न, राज्य सूचना आयोग का आरटीआई पुरस्कार, अंतरराष्ट्रीय भारत सम्मान अचीवर्स अवार्ड सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
भारतीय राजभाषा सम्मेलन में संयुक्त सचिव अभिषेक झा, पार्श्व गायक हरिहरन, कथाकार नीलेश मिसरा, वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष प्रो. हितेंद्र मिश्र, जॉयदीप चट्टोपाध्याय, लखनऊ के डीआईजी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज, तापी जिले के जिलाधिकारी देव चौधरी, आईपीएस वचन कांडपाल, कस्टम आयुक्त श्रद्धा जोशी शर्मा, मुख्य आयकर आयुक्त मीनाक्षी सिंह, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी कल्याण कुमार, इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंध निदेशक अजय कुमार श्रीवास्तव, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष पाण्डेय, महालेखाकार वरुण अहलूवालिया तथा इंडियन बैंक की मुख्य महाप्रबंधक वीएन माया सहित विभिन्न वक्ताओं ने संबोधित किया।
