दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की वजह आई सामने, NHAI ने भारी बारिश और जल निकासी में बाधा को बताया कारण

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की वजह आई सामने, NHAI ने भारी बारिश और जल निकासी में बाधा को बताया कारण
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नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे पर सड़क धंसने की घटना को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि 1 जुलाई 2026 को किलोमीटर 55+480 पर सड़क की सतह धंसने का मुख्य कारण पिछली रात हुई भारी बारिश, स्थानीय स्तर पर जलभराव तथा स्थायी क्रॉस-ड्रेनेज प्रणाली को चालू करने में आ रही बाधाएं थीं।

एनएचएआई के अनुसार, 1 जुलाई की सुबह नियमित निरीक्षण के दौरान परियोजना टीम ने प्रभावित हिस्से की पहचान कर तत्काल मरम्मत कार्य शुरू किया। प्राथमिकता के आधार पर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत पूरी कर यातायात को सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित कराया गया।

प्राधिकरण ने बताया कि उक्त स्थान पर निर्मित बैलेंसिंग कल्वर्ट को वर्षा जल को मीडियन के पार सुरक्षित रूप से निकालने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया था, लेकिन स्थानीय निवासियों के विरोध के कारण इसे क्रॉस-ड्रेनेज प्रणाली से जोड़ा नहीं जा सका। एनएचएआई का दावा है कि कुछ स्थानीय लोग पुलिया के मुहाने का उपयोग वाहनों की आवाजाही के लिए कर रहे हैं और जल निकासी व्यवस्था को जोड़ने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। इसी वजह से भारी बारिश के दौरान पानी सड़क पर जमा हो गया, जिससे सड़क की सतह धंस गई।

एनएचएआई ने यह भी बताया कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े लंबित मध्यस्थता विवाद के कारण संबंधित क्षेत्र में स्थायी ढलान सुरक्षा (Slope Protection) और ढलानदार नाली (Chute Drain) का निर्माण कार्य भी रुका हुआ है। कई प्रयासों के बावजूद संबंधित भू-स्वामियों से अनुमति नहीं मिलने के कारण परियोजना के स्थायी सुरक्षा उपाय पूरे नहीं किए जा सके हैं।

स्थिति से निपटने के लिए एनएचएआई ने लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी अंतरिम समानांतर नाली के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। साथ ही बैलेंसिंग कल्वर्ट के चालू होने तक वर्षा जल को सुरक्षित रूप से किलोमीटर 56+500 स्थित एंट्री-एग्जिट पॉइंट तक पहुंचाने के लिए नाली के ढाल को भी पुनः डिजाइन किया जा रहा है।

एनएचएआई ने कहा कि प्रभावित स्थल की लगातार निगरानी की जा रही है और यातायात की सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही के लिए सभी आवश्यक संसाधन तैनात हैं। भूमि विवाद का समाधान होते ही स्थायी ढलान सुरक्षा और जल निकासी से जुड़े शेष कार्य तत्काल पूरे किए जाएंगे।

प्राधिकरण ने दोहराया कि वह राजमार्ग सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और परिचालन दक्षता के उच्चतम मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है तथा समय पर रखरखाव और मौसम संबंधी चुनौतियों पर त्वरित कार्रवाई उसकी परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली का अभिन्न हिस्सा है।

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देवभूमि खबर

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