नैनी झील में 35 साल बाद स्नो ट्राउट की वापसी, जलीय पारिस्थितिकी को मिलेगा लाभ
रिपोर्ट: ललित जोशी
नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल की नैनी झील में विलुप्त हो चुकी महाशीर और स्नो ट्राउट मछलियों के संरक्षण और पुनर्संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। आयुक्त कुमाऊं एवं सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने तल्लीताल स्थित सेंट जॉसेफ स्वीमिंग हाउस के समीप मत्स्य केज में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग कर इस पहल की जानकारी दी।
दीपक रावत ने बताया कि 1990 के दशक में नैनी झील से महाशीर (ट्रोप्टिटोरा) और स्नो ट्राउट मछलियां विलुप्त हो चुकी थीं। वर्ष 2005 में महाशीर प्रजाति का पुनः संचय किया गया, जो अब अच्छी तरह विकसित हो चुकी है। वहीं, देसी प्रजाति स्नो ट्राउट का लगभग 35 साल बाद पुनः संवर्धन सुनिश्चित किया गया है।
यह कार्य कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. डीएस रावत, रजिस्ट्रार डॉ. एमएस मंदरवाल तथा जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. एचसीएस बिष्ट के निर्देशन में किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार स्नो ट्राउट झील में पनप रही काई का भक्षण कर नाइट्रोजन संतुलन बनाएगी और जल में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में सहायक होगी, जिससे झील की पारिस्थितिकी बेहतर होगी।
परियोजना के तहत मछली के बीज का उत्पादन ट्रीटमेंट प्लांट में कर उनकी अंगुलिकाएं तैयार की गईं, जिन्हें झील में छोड़ा गया है। इस पहल को झील के जैविक संतुलन सुधारने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष सरस्वती खेतवाल, कुमाऊं विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्रोफेसर, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

