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25 वर्षों बाद भी अधूरी सड़क, ग्रामीणों का आक्रोश: “रोड नहीं तो वोट नहीं” की चेतावनी

25 वर्षों बाद भी अधूरी सड़क, ग्रामीणों का आक्रोश: “रोड नहीं तो वोट नहीं” की चेतावनी
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अल्मोड़ा। विकासखंड भैसियाछाना के कनारीछीना-बिनूक-पतलचौरा सड़क मार्ग का निर्माण उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है। लगभग पांच किलोमीटर लंबे इस सड़क मार्ग के निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक यह योजना केवल कागजों तक ही सीमित रही है। क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि राज्य में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन इस सड़क के निर्माण की ओर किसी ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।

सड़क मार्ग का निर्माण न होने से रीम, पिपलखेत, कनारी, बिनूक, पतलचौरा और चिमचुआ सहित कई गांवों के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क तो दूर, कई स्थानों पर पैदल चलने योग्य रास्ता भी ठीक स्थिति में नहीं है। पिछले सात-आठ वर्षों से ग्रामीण विभिन्न विभागों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन फाइलें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक ही घूमती रही हैं।

ग्रामीण महिलाओं को जंगलों से घास और लकड़ी लाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं, किसी बुजुर्ग या गर्भवती महिला को निकटतम बाजार कनारीछीना ले जाने की आवश्यकता पड़ने पर आज भी डोली का सहारा लेना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बनने से क्षेत्र के अनेक गांवों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी।

पतलचौरा और चिमचुआ गांव अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार अनुसूचित जाति क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित करती है, लेकिन इन गांवों को आज तक सड़क सुविधा से वंचित रखा गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप सिंह नेगी ने सड़क निर्माण में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि वर्ष 2027 तक इस सड़क मार्ग का निर्माण नहीं हुआ तो क्षेत्र की जनता आगामी विधानसभा चुनाव में “रोड नहीं तो वोट नहीं” के नारे के साथ आंदोलन करने को मजबूर होगी।

देवभूमि खबर

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