साइबर अपराधों पर सख्ती: उत्तराखंड पुलिस और दूरसंचार विभाग ने बनाया संयुक्त एक्शन प्लान
देहरादून। साइबर अपराधों की रोकथाम, फर्जी सिम कार्डों के दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश तथा दूरसंचार सेवाओं के सुरक्षित एवं पारदर्शी उपयोग को लेकर उत्तराखंड पुलिस और भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) वी. मुरुगेशन ने की।
बैठक में साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप, फर्जी एवं अनियमित सिम एक्टिवेशन पर नियंत्रण, तकनीकी समन्वय, सूचना के त्वरित आदान-प्रदान तथा संयुक्त प्रवर्तन (Joint Enforcement) को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी और नीतिगत उपायों पर भी सहमति जताई।
बैठक में ‘संचार साथी (Sanchar Saathi)’ पोर्टल की विभिन्न सुविधाओं की जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि CEIR (Central Equipment Identity Register) के माध्यम से चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक, ट्रैक और बरामद होने पर पुनः अनब्लॉक किया जा सकता है। वहीं TAF-COP सेवा के जरिए नागरिक अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी प्राप्त कर फर्जी या अनधिकृत सिम की पहचान कर उन्हें बंद कराने का अनुरोध कर सकते हैं।
इसके अलावा ‘चक्षु (Chakshu)’ सुविधा के माध्यम से संदिग्ध कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप संदेश, फर्जी केवाईसी, बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, बिजली बिल, निवेश, लॉटरी, पार्सल और डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर धोखाधड़ी के प्रयासों की रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है। साथ ही साइबर ठगी में प्रयुक्त मोबाइल नंबर, ई-मेल और अन्य संचार माध्यमों की शिकायत करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
बैठक में उत्तराखंड पुलिस और दूरसंचार विभाग के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत करने, फर्जी सिम एक्टिवेशन रोकने के लिए तकनीकी एवं नीतिगत सुधार लागू करने तथा संचार साथी, TAF-COP और CEIR पोर्टलों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक के अंत में अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरुगेशन ने निर्देश दिए कि राज्यभर में जन-जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को संचार साथी पोर्टल की सुविधाओं की जानकारी दी जाए, ताकि नागरिक साइबर अपराधों से सुरक्षित रह सकें और डिजिटल सेवाओं का सुरक्षित उपयोग कर सकें।

