प्रांतीय रक्षक दल हित संगठन की प्रदेश स्तरीय बैठक देहरादून में सम्पन्न, मुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर पीआरडी जवानों की दो प्रमुख मांगों के समाधान की अपील

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देहरादून। दिनांक 30 नवम्बर 2025 को प्रेस क्लब देहरादून में प्रांतीय रक्षक दल हित संगठन की प्रदेश स्तरीय बैठक शाम 5:00 बजे आयोजित की गई। बैठक का नेतृत्व प्रदेश संयोजक श्री प्रमोद मंद्रवाल, जिला अध्यक्ष श्री गंभीर सिंह रावत, प्रदेश सलाहकार श्री रामानन्द भट्ट एवं प्रदेश महासचिव श्री संजय पवार ने किया। बैठक में बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

बैठक में मौजूद पदाधिकारियों में प्रमुख रूप से प्रदेश संयोजक प्रमोद मंद्रवाल, सचिव संजय सिंह पंवार, जिला अध्यक्ष देहरादून गंभीर सिंह रावत, प्रदेश सचिव रीना पारल, प्रदेश प्रवक्ता सत्येंद्र नौगाई, प्रदेश सलाहकार रामानंद भट्ट, जिला उपाध्यक्ष अजय कुमार, सुनील लखवाल, तथा सक्रिय सदस्य — राजेश नेगी, नवीन बिष्ट, सुधीर तोमर, पंकज कुमार, अमित कुमार, रंजना देवी, अशोक कुमार आदि शामिल रहे।

बैठक के उपरांत संगठन की ओर से मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी तथा माननीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्रीमती रेखा आर्या को ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि पिछले 25 वर्षों से उत्तराखण्ड में प्रांतीय रक्षक दल जवानों की मूलभूत समस्याओं पर शासन द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जबकि पीआरडी जवान प्रतिदिन 10–12 घंटे सरकारी एवं गैर सरकारी विभागों में निष्ठापूर्वक सेवाएं दे रहे हैं।

संगठन ने ज्ञापन में कहा कि सरकार द्वारा होमगार्ड एवं उपनल कर्मचारियों के लिए समान कार्य का समान वेतन लागू करना सराहनीय है, लेकिन पीआरडी जवान भी उन्हीं की तरह सेवाएं दे रहे हैं, इसलिए उनके साथ सौतेला व्यवहार नहीं होना चाहिए। संगठन ने आग्रह किया कि पीआरडी जवानों की समस्याओं पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए शासनादेश जारी किया जाए, जिससे जवान व उनके परिवार सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।

संगठन ने मांग रखी कि आगामी 11 दिसंबर 2025 को स्थापना दिवस के अवसर पर सरकार पीआरडी जवानों की मांगों की घोषणा कर अपनी उदारता दर्शाए। ज्ञापन में दो मुख्य मांगें जिनमें पीआरडी जवानों के आगे स्वयंसेवक शब्द हटाकर पीआरडी कार्मिक किया जाए। साथ ही जवानों को होमगार्ड एवं उपनल की भाँति 365 दिन का रोजगार व समान कार्य का समान वेतन प्रदान किया जाए।

देवभूमि खबर

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