भारी बारिश के बीच राज्य आंदोलनकारी मंच का दो दिवसीय प्रादेशिक सम्मेलन शुरू, लंबित मांगों के शीघ्र निस्तारण का आश्वासन

देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच की ओर से पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत शनिवार, 30 अगस्त को दो दिवसीय प्रादेशिक सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। प्रातः 11 बजे शहीदों को पुष्प अर्पित कर सम्मेलन की शुरुआत की गई। भारी बारिश के बावजूद सभागार आंदोलनकारियों से खचाखच भरा रहा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश कमेटी की बैठक में व्यस्तता के चलते सम्मेलन में उपस्थित नहीं हो सके। उनकी ओर से आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल ने मुख्यमंत्री का संदेश पत्र पढ़कर सुनाया और उनकी ओर से क्षमा प्रकट की।
इसके बाद कैबिनेट मंत्री खजान दास, धर्मपुर विधायक विनोद चमोली, राज्य मंत्री अशोक वर्मा, आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष हुकम सिंह, उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, उपाध्यक्ष सरोज कोठारी तथा राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह ने दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया। ऋषिकेश की आंदोलनकारी लक्ष्मी बुडाकोटी ने मंगल गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
सम्मेलन के पहले सत्र में राज्य आंदोलनकारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। प्रदेशभर से पहुंचे आंदोलनकारियों ने चिन्हीकरण के लंबित मामलों, क्षैतिज आरक्षण में कथित भेदभाव, राज्य आंदोलनकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन से वंचित किए जाने, सभी आंदोलनकारियों को एक समान सम्मानजनक पेंशन देने तथा वर्ष 2011-12 में परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले आंदोलनकारियों की नियुक्ति सहित विभिन्न मांगों को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
आंदोलनकारियों ने सरकार से इन मामलों का शीघ्र निस्तारण कर आवश्यक शासनादेश जारी करने की मांग की। सम्मेलन में मौजूद पैनल ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि जल्द ही मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर सभी प्रमुख बिंदुओं पर वार्ता की जाएगी तथा समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करते हुए शासनादेश जारी कराया जाएगा।
दूसरे सत्र में ‘राज्य के शहीदों के सपनों के अनुरूप कहां हैं प्रदेश?’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया। इस सत्र में विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, मेयर सौरभ थपलियाल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के समर भंडारी, पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत, प्रेम बहुखंडी तथा परिवर्तन पार्टी के प्रभात ध्यानी सहित विभिन्न वक्ताओं ने राज्य निर्माण के उद्देश्यों और वर्तमान उत्तराखंड की स्थिति पर अपने विचार रखे।
सम्मेलन में जगमोहन सिंह नेगी, केशव उनियाल, जयदीप सकलानी, रामलाल खंडूरी, पृथ्वी सिंह नेगी, भानु रावत, सुरेश नेगी, संजय पुंडीर, धर्मपाल सिंह रावत, ध्यानपाल बिष्ट, उमादत्त जुगरान, सुलोचना भट्ट, पुष्पलता सिलमाना, द्वारिका बिष्ट, अरुणा थपलियाल, विजयलक्ष्मी गुसाईं, सुरेंद्र अग्रवाल, मोहम्मद शाहिद, रघुवीर सिंह तोमर, राजेश पांथरी, सुदेश सिंह, सुशील चमोली, मनोज नौटियाल, मोहन थापा, मनोज जायड़ा और ओमप्रकाश सत्ती समेत बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।
