उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने किया UCC के दुष्परिणामों के खिलाफ धरना प्रदर्शन

उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने किया UCC के दुष्परिणामों के खिलाफ धरना प्रदर्शन
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देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच द्वारा गांधी रोड स्थित दीनदयाल पार्क में पूर्व घोषणा के अनुसार “UCC के दुष्परिणाम एवं संस्कृति की रक्षा हेतु” धरना आयोजित किया गया। धरने का संचालन पूरण सिंह लिंगवाल तथा अध्यक्षता जगमोहन सिंह नेगी द्वारा की गई।

धरने में भाग लेने वाली वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी पुष्पलता सिलमाणा, सुभागा फर्स्वाण एवं केशव उनियाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति लिविंग इन रिलेशनशिप जैसे संबंधों को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं देती। उन्होंने कहा कि इससे घर और समाज का माहौल खराब हो सकता है। वक्ताओं ने मांग की कि सरकार सामाजिक संगठनों, बौद्धिक समाज एवं धार्मिक धामों के पुजारियों से विचार-विमर्श कर इस शब्द को हटाए, जिससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाए।

अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, सुलोचना भट्ट और उत्तराखंड फिल्म जगत के वरिष्ठ लेखक एवं निर्देशक प्रदीप भंडारी ने भी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति की दिशा में मार्गदर्शन देना चाहिए, न कि लिविंग इन रिलेशनशिप जैसी अवधारणाओं में उलझाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि ऐसा कोई कानून न भारत के किसी राज्य में है और न ही विश्व में, फिर देवभूमि उत्तराखंड में इसे क्यों लागू किया जा रहा है? यदि इसे तत्काल प्रभाव से नहीं हटाया गया तो जनजागरण के माध्यम से प्रदेशवासी सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे।

प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, महासचिव रामलाल खंडूड़ी और गणेश डंगवाल ने भी सरकार से इस विषय पर गंभीर पुनर्विचार करने और बुद्धिजीवियों तथा सामाजिक संगठनों से व्यापक विचार-विमर्श कर उचित निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाए तो आंदोलनकारी मंच बड़ा जन आंदोलन छेड़ेगा।

धरने के समापन पर संचालन कर रहे पूरण सिंह लिंगवाल ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि आखिर सरकार कब बदलेगी अपनी सोच? उन्होंने सभी से उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच द्वारा बनायी गई लिविंग इन रिलेशनशिप पर आधारित फिल्म को यूट्यूब पर देखने की अपील भी की।

धरने में प्रमुख रूप से केशव उनियाल, जगमोहन सिंह नेगी, रामलाल खंडूड़ी, प्रदीप कुकरेती, आमोद पैन्युली, विशंभर दत्त बौंठियाल, चंद्रकिरण राणा, पूरण सिंह लिंगवाल, गणेश डंगवाल, मनोज नौटियाल, बुद्धिराम रतूड़ी, हरी सिंह मेहर, धनंजय घिल्डियाल, विनोद असवाल, नरेंद्र नौटियाल, पुष्पलता सिलमाणा, राधा तिवारी, सुलोचना भट्ट, तारा पांडे, संगीता रावत, अरुणा थपलियाल, शकुंतला रावत, द्वारिका बिष्ट, सुभागा फर्स्वाण, प्रभात डंडरियाल, रोशनी देवी, सरोजनी नौटियाल, देवेश्वरी रावत, पुष्पा रावत, वीरेन्द्र सिंह, सुशीला चमोली, राजेश्वरी रावत, मीरा गुसाईं, राजेश्वरी ममगाईं, यशोदा रावत, सुनीता बहुगुणा, कल्पेश्वरी राणा, सुरेन्द्र नेगी, शिला जखमोला और राजेश्वरी देवी समेत कई आंदोलनकारी शामिल रहे।

देवभूमि खबर

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