दीपक तले अंधेरा उत्तरकाशी के नजदीक 2 किलोमीटर मौजूद गांव ना ही सड़क पहुंची और ना ही पुल, दावे हुए फेल
विनीत कंसवाल, उत्तरकाशी*
उत्तरकाशी। सूबे की डबल इंजिन सरकार पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की बयार बहाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। लेकिन इन दावों की खोखली हकीकत बयां कर रही है स्युणा गांव की भागीरथी नदी पर बनी अस्थाई पुलिया। तस्वीरों से ऐसा लग रहा है कि हो सकता है कि यह उत्तरकाशी जनपद का कोई दूरस्थ गांव होगा। लेकिन सरकार के विकास के दावे की हकीकत बयां कर रहा है जनपद मुख्यालय से महज 4 किमी की दूरी पर स्थित गांव। जहां के ग्रामीणों का जीवन अस्थाई पुलिया के सहारे अटक कर रह गया है।
उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय से महज 4 किमी की दूरी पर स्थित स्युणा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बसे 35 से 40 परिवार दो ग्राम सभाओं मांडो और सिरोर के अंतर्गत आते हैं। लेकिन उसके बाद भी आज तक शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नजर ग्रामीणों की समस्या पर नहीं गई है। सर्दियों में भागीरथी का जलस्तर कम होने पर ग्रामीण गंगोरी से स्युणा गांव के लिए हर वर्ष लकड़ी की अस्थाई पुलिया बनाते हैं। जो कि बांध से पानी छोड़े जाने नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ बह जाती है। तो फिर ग्रामीण इसका निर्माण करते हैं और वर्षों से यही सिलसिला जारी है।
स्युणा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गर्मियां आते ही नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। तो फिर ग्रामीण करीब 3 किमी की अतिरिक्त पैदल दूरी भागीरथी नदी के किनारे से तय करते हैं। लेकिन बरसात में कई बार वह रास्ते भी नदी के विकराल जलस्तर में डूब जाते हैं और ग्रामीण अपने गांव में ही कैद होकर रह जाते हैं। लेकिन उसके बाद भी आजतक ग्रामीणों की किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही है।

