महिला चिकित्सालय पौड़ी में एसिड हमले से पीड़ित महिलाओं के सम्बन्ध में विचार-गोष्ठी

Spread the love

पौड़ीउत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के निर्देशानुसार एसिड हमले से पीड़ित महिलाओं के सम्बन्ध में आज महिला चिकित्सालय पौड़ी गढ़वाल में एक विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम श्रीमान सिविल जज/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल श्री संदीप कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। कार्यक्रम में उन्होंने एसिड हमले से पीड़ित महिलाओं के संबंध में विचार-विमर्श किया तथा बताया कि एसिड़ हमलों की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय हैं। एसिड हमलों में दोषियों को दंडित करने के लिए अपराधिक विधि संशोधन अधिनियम 2013 के द्वारा धारा 326ए तथा 326बी जैसे कठोर प्राविधान किये गये हैं। जिसमें उम्र कैद की सजा का भी प्राविधान है। एसिड़ हमले से पीड़ितों को न केवल शारीरिक क्षति होती है बल्कि उसकी आत्मा की चोटिल होती है। शारीरिक विकृतता के कारण पीड़ित को समाज में मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ती है तथा चिकित्सीय उपचार में लाखों रूपए भी व्यय करने पड़ते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय ने लक्ष्मी बनाम भारत संघ के प्रकरण में देश के समस्त राज्यों में ऐसे पीड़ितों की समाज में सहायता के निर्देश दिये थे। जिसके अनुक्रम में उत्तराखंड सरकार के द्वारा 2013 में सहायता योजना तैयार की गई। जिसके तहत पीड़ित को डेढ़ लाख तक का मुआवजा दिया जाता है। जबकि उच्च न्यायालय ने लक्ष्मी बनाम भारत संघ में ऐसे पीड़ितों के लिए कम से कम तीन लाख के मुआवजे के निर्देश जारी किये थे। वर्ष 2018 में राज्य बनाम आजम के प्रकरण में माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देशित किया कि एसिड हमलों के प्रकरणों में एक लाख रूपए तत्काल अनुग्रह धनराशि तथा सात हजार रूपए प्रत्येक माह उपचार हेतु दिये जाए। एसिड हमलों के पीड़ितों को तीन लाख रूपए का मुआवजा अतिरिक्त रूप से दिया जाना चाहिए। उक्त विचार गोष्ठी में सचिव महोदय ने उपस्थित प्रतिभागीगणों को बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने लक्ष्मी बनाम भारत संघ में एसिड विक्रय को रेगुलेट करने के लिए भी राज्य सरकारों को रेगुलेट बनाने के निर्देश दिये थे। जिसके अनुक्रम में उत्तराखंड राज्य द्वारा 2015 में नियमावली बनाई गई। जिसके तहत लाइसेंस के बिना एसिड विक्रय नहीं किया जा सकता है और न ही 18 वर्ष से कम आयु वाले को एसिड विक्रय किया जाएगा तथा विक्रेता को एसिड विक्रय का पूरा लेखा-जोखा रखना होगा, साथ ही क्रय-विक्रय का स्टॉक भी अंकित करना होगा। उन्होंने कहा कि एसिड हमलों के पीड़ितों को कोई अस्पताल उपचार करने से मना नहीं कर सकता। चिकित्सकों को यह भी जानकारी दी गई कि एसिड हमलों से पीड़ितों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाना चाहिए। जिससे वह स्वयं को समाज की मुख्य धारा से अलग महसूस न करें। उक्त कार्यक्रम में सीएमएस डा0 मेघना असवाल, महिला चिकित्सक डा. विनीता सैनी, डा. विकास घिल्डियाल, डा. राखी कुकरेती, निधि, मनोज शाह, वीरेंद्र नेगी, योगेंद्र कुमार, विनोद कुमार, पीएलवी देवप्रकाश, हेमलता बिष्ट आदि उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

Related articles