वूमेन एम्पावरमेंट इन द ऐज ऑफ इन्फार्मेटिक्स एंड जीनोमिक्स पर हुई चर्चा

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देहरादून।देवभूमि खबर। द वर्ल्ड इंटीग्रिटी सेंटर इंडिया ने आज अपने परिसर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया। इस अवसर पर वूमेन एम्पावरमेंट इन द ऐज ऑफ इन्फार्मेटिक्स एंड जीनोमिक्स पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में उपस्थित पनेलिस्ट्स में निदेशक उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान केंद्र डॉ दुर्गेश पंत, मुख्य कार्यकारी जीनोमिक्स और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन डॉ सुजाता सिंह, वैज्ञानिक लेखक और महिला सशक्तीकरण कार्यकर्ता कुसुम रावत और रिसर्च एंड इनोवेटर फोरसाइट बायोटेक डॉ सिद्धार्थ मानवती रहे।
कार्यक्रम के बारे में बताते हुए, अध्यक्ष डब्ल्यूआईसी इंडिया नाजिआ युसूफ इज्जुदीन ने कहा, “विकास की वजह से हमारे देश की महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लाभ उठाया है। देश भर में स्वास्थ्य की स्थिति में काफी सुधार हुआ है लेकिन भारत में जीनोमिक्स की भूमिका बढ़ने पर सवाल उठते हैं। हमें लगता है कि सूचना प्रौद्योगिकी अभूतपूर्व अवसर प्रदान करती है, लेकिन विज्ञान, इंजीनियरिंग, गणित, डिजाइन आदि के क्षेत्र में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के बिना नहीं। अपने मंच के तहत यू-सर्क ने विभिन्न प्रासंगिक मुद्दों जिसमें कोसी और रिस्पना नदी, विज्ञान कॉन्क्लेव ऑफ एग्रीकल्चर और जेनेटिक लिटरेसी वर्कशॉप आदि शामिल है। उन्होंने दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं में साक्षरता कैसे बढ़ी है। उन्होंने उस समय को याद किया जब महिलाओं में साक्षरता दर 8.57 प्रतिशत थी।
डॉ सुजाता सिंह ने जीनोमिक के क्षेत्र में एक दशक से अधिक समय तक काम किया है। उन्हांेने जीनोमिक्स, डीएनए और क्रोमोसोम पर प्रकाश डाला। उन्होंने गुणसूत्रों और विस्तृत कारकों के पीछे के सिद्धांत को समझाया जो एक बच्चे के लिंग का निर्धारण करते हैं। सुजाता को ऑस्ट्रेलिया की सरकार से एंडेवर एग्जीक्यूटिव अवार्ड 2010 और जीनोमिक्स के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए डॉ बीएन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। कुसुम रावत ने दर्शकों के साथ अपने विचार साझा करते हुए कहा, “मैंने नवदुनिया सहित विभिन्न संगठनों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के लिए काम किया है। एक लेखक के रूप में भी मैंने राज्य के उन वीरों की कहानियों को कलमबद्ध किया है जिन्होंने पहाड़ में बड़ी शिद्दत से काम किया है।” बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी करने वाले डॉ सिद्धार्थ मानवती ने कहा कि वह एक अलग सोच रखने में विश्वास करते हैं।उन्होंने आगे कहा की उनके लिए उपन्यास के विचार सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि नवाचारों के लिए सामाजिक आवश्यकताएं बड़ी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने महिलाओं की भावना को भी सलाम किया और कहा कि यह अनुकरणीय है कि वे अपने घरों, काम और सामाजिक जीवन को कैसे संतुलित करते हैं।

देवभूमि खबर

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