सर्विक्स कैंसर की रोकथाम के लिए अनिवार्य वेक्सीनेशन पॉलिसी बनाने पर जोर

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ऋषिकेश । महाबीर सिह।देवभूमि खबर ।। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में यूरोपियन सोसाइटी ऑफ रेडिएशन ओंकोलॉजी व इंडियन सोसाइटी ऑफ रेडिएशन ओंकोलॉजी के संयुक्त तत्वावधान आयोजित तीसरा अंतरराष्ट्रीय इस्ट्रो एरॉय गाइनी टीचिंग कोर्स कार्यशाला रविवार को संपन्न हो गई। इस दौरान संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने देश में सर्विक्स कैंसर की रोकथाम के लिए अनिवार्य वेक्सीनेशन पॉलिसी बनाने पर जोर दिया, जिससे महिलाओं को इस कैंसर से ग्रसित होने से रोका जा सके। इंटरनेशनल कार्यशाला के समापन अवसर पर निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने अपने संदेश में बताया कि हालांकि सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन लगाकर पूर्ण रूप से रोका जा सकता है, मगर अभी हिंदुस्तान में इसकी रोकथाम को उपलब्ध वैक्सीन बहुत अधिक प्रचलित नहीं है। लिहाजा सरकार को महिलाओं को यूट्राइन सर्विक्स कैंसर से बचाने के लिए इस पर पॉलिसी बनानी चाहिए। जिसके तहत नौ से 14 वर्ष की प्रत्येक बालिका को यह वैक्सीन लगाई जाए और आने वाले समय में कैंसर सर्विक्स को देश से पूरी तरह से मिटाया जा सके। एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि कैंसर सर्विक्स को पूरी तरह कैंसर बनने से पहले पकड़ा जा सकता है, जिसका पैपिस्मियर नामक बहुत सरल टेस्ट होता है।इस कैंसर की अवस्था का पता लगते ही एक बेहद सरल विधि से इसका उपचार किया जा सकता है और उसे कैंसर बनने से रोका जा सकता है। निदेशक एम्स ने बताया कि हर वह महिला जो सेक्सुअली एक्टिव है,उसे प्रत्येक तीन साल में पैप टेस्ट करा लेना चाहिए। निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में पैपिस्मियर टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। डेनमार्क के विशेषज्ञ डा.कैरी टेंडरप ने अपने व्याख्यान में रेडियो थैरेपी से होने वाले साइड इफेक्ट को कैसे कम किया जा सकता है, इस बाबत विस्तृत जानकारी दी। डा. रिचर्ड पोर्टर ने हैंड्सऑन वर्कशॉप में प्रतिभागियों को रेडियोथैरेपी की प्लानिंग की बारिकियां समझाई। कार्यशाला के समन्वयक व एम्स रेडिएशन ओंकोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो.मनोज गुप्ता ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य तभी सफल होगा, जब सभी प्रशिक्षु प्रतिभागी कार्यशाला में दिए गए ज्ञान को अपने सेंटर में जाकर लागू करें, जिससे अधिकाधिक मरीजों को इसका लाभ मिल सके। कार्यशाला में बेल्जियम की मैलिसा, डा.जैमिना आदि ने भी व्याख्यान दिए। इस अवसर पर डा.राजेश पसरीचा, डा.दीपा जोसेफ, डा.स्वीटी गुप्ता, डा.रचित, डा.अजय आदि मौजूद थे।

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