गंगा संरक्षण के लिए क्रियात्मक कार्य किए जायेंगें:जिलाधिकारी

रुद्रप्रयाग।देवभूमि खबर। जिला कार्यालय सभागार में जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल की अध्यक्षता में जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें निर्णय लिया गया कि जनपद के सभी स्थानीय निकायों में कूडा पृथककरण को लेकर सोर्स सेग्रिगेशन सप्ताह का आयोजन सोमवार से तीस जून तक किया जायेगा। साथ ही जिलाधिकारी ने नमामि गंगे के अन्तर्गत चिन्हित हाॅट गांव में गंगा पिक्निक मनाये जाने की कार्य योजना बनाने के निर्देश भी स्वजल विभाग को दिए। उन्होंने बताया कि हाॅट गांव में गंगा संरक्षण के लिए क्रियात्मक कार्य किए जायेंगें और लोगों को जागरूक किया जाएगा। निकायों में कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिलाधिकारी ने संयुक्त मजिस्ट्रेट प्रतीक जैन को नोडल अधिकारी बनाया है।
इसके साथ ही बताया कि स्थानीय निकायों के सभी वार्डो में सभासद, जनप्रतिनिधि, एनएसएस के छात्र-छात्राओं, स्थानीय व्यापारियों, स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा घर-घर जाकर लोगों को कूडे को अलग-अलग करने के लिए जागरूक किया जायेगा। इससे यह लाभ होगा कि नगर निकायों को कूडा घर से ही सूखा व गीला अलग-अलग प्राप्त होगा और नगर निकायों को जैविक कूडे़ का कम्पोस्ट बनाने व अजैविक कूडे़ को काम्पेक्ट करने में आसानी होगी। जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी नगर निकायों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी जैविक कूडे़ के गडढे में प्लास्टिक व अजैविक सामाग्री नहीं होनी चाहिए। ऐसा पाये जाने पर सम्बन्धित ईओ से अजैविक सामाग्री को गडढे से निकलवाया जायेगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि जनपद के अंतर्गत रुद्रप्रयाग को छोड़कर जहां भी नालों को पानी सीधा नदियों में जाता है। ऐसे स्थानों को सिंचाई व स्वजल विभाग द्वारा चिन्हित कर कार्य योजना बनाई जाएगी। नाले सीधे नदी में न जांय, इसके लिए घरों व नदी के आस-पास सोख्ता गड्ढे बनाए जायेंगे। जिलाधिकारी ने नमामि गंगे के अन्तर्गत चिन्हित हाॅट गांव में गंगा पिक्निक मनाये जाने की कार्य योजना बनाने के निर्देश स्वजल विभाग को दिए। हाॅट गांव में गंगा संरक्षण के लिए क्रियात्मक कार्य किए जायेंगें व लोगों को जागरूक किया जाएगा। बैठक में पर्यावरणविद राजेन्द्र गोस्वामी ने बताया कि नाली का निर्माण करते समय इसके बेस कच्चे रखे जांय, इससे पानी का सीपेज भूमि हो, खेतों की मेडे भी ऊंची बनाई जाय जिससे मानसून अवधि में खेतों के माध्यम से पानी का सीपेज भूमि हो, जल स्त्रोतों के आस-पास जहां भी बंजर खेत हो वहां चैडे़दार पत्ती के पौधों का रोपण किया जाय। साथ ही बंजर खेतों को खुदवाया जाय, इससे बरसात का पानी भूमि में जायेगा, अन्यथा बंजर खेतों से पानी में सीपेज नहीं हो पाता, क्योंकि बंजर खेतों का सर्फेस हार्ड हो जाता है। इस अवसर पर डीएफओ मयंक शेखर, प्रभारी अधिकारी जिला कार्यालय मायादत्त जोशी, अधिशासी अभियंता सिंचाई पीएस बिष्ट, मुख्य शिक्षा अधिकारी सीएन काला, माध्यमिक एलएस दानू, बेसिक विद्या शंकर चतुर्वेदी, पर्यावरणविद् पीएस मटूडा, राजेन्द्र गोस्वामी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

