सेहत के मामले में यूपी नीचे पायदान पर,केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार
नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश की केंद्र की सत्ता में धमक भले ही सबसे ऊपर हो, लेकिन सेहत के मामले में यह राज्य देश में सबसे निचले पायदान पर खिसक गया है. जी हां, डॉक्टरों की कमी और प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर कम खर्च राज्य की खराब सेहत के प्रमुख कारण हैं. उत्तर प्रदेश की खराब सेहत का राज नीति आयोग की रिपोर्ट से उजागर हुआ है. आयोग की स्वास्थ्य रिपोर्ट में यूपी को सबसे निचले पायदान पर रखा गया है. जबकि केरल इस सूची में सबसे ऊपर है.
ये कहती है नेशनल हेल्थ प्रोफाइल की रिपोर्ट
नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2015 के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 65,343 डॉक्टर पंजीकृत हैं, जिनमें से 52,274 राज्य में प्रैक्टिस करते हैं. राज्य की आबादी और डॉक्टरों की इस संख्या के अनुसार प्रत्येक डॉक्टर पर 3,812 मरीजों को देखने की जिम्मेदारी है. जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक डॉक्टर के जिम्मे 1000 मरीज होने चाहिए. देश के सबसे अधिक आबादी वाले उत्तर प्रदेश में लगभग दो लाख डॉक्टरों की जरूरत है….

