सावन में भगवान शिव की पूजा अर्चना विशेष फलदायी सिद्ध होती हैः स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी
हरिद्वार।देवभूमि खबर। श्री दक्षिण काली पीठाधीश्वर म.म.स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। सावन में भगवान शिव की पूजा अर्चना विशेष फलदायी सिद्ध होती है। जो व्यक्ति के भौतिक कष्टों को दूर कर उसके जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाकर अंधकार रूपी अज्ञान को दूर करती है। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी सावन माह में प्रतिदिनि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विधि विधान से पूजा अर्चना व रूद्राभिषेक करते हैं।उन्होंने कहा कि भगवान शिव को प्रकृति से अटूट प्रेम है। भगवान शिव की पूजा अर्चना में विभिन्न प्रजाति के फूल व फलों का उपयोग किए जाने से भगवान शिव अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। लाखों करोड़ों शिव भक्त श्रद्धालु अनेकों कष्ट
सहनकर भगवान शिव की आराधना सावन माह में करते हैं। परिवारों में सुख समृद्धि व संपन्नता की कामना को लेकर सच्चे मन से पूजा अर्चना के क्रम जारी रहते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का पाठ घर घर में किया जाता है। भगवान शिवभक्त की सूक्ष्म आराधना से ही प्रसन्न होकर भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। शिव उपासना में लीन रहने का जीवन भवसागर से पार हो जाता है। कष्टों से मुक्ति पानी है तो भोलेनाथ की शरण में भक्तों को आना चाहिए। श्री दक्षिणकाली मंदिर एक माह के अनुष्ठान में देश के विभिन्न प्रांतों से आए पंडितों द्वार दुग्धाभिषेक मंत्रोच्चारण कर भगवान शिव की आराधना की जाती है। स्वामी कैलाशानन्द ब्रह्मचारी पूरे सावन मौन साधना में लीन रहते हैं। साधना के दौरान रात्रि आठ से नौ बजे तक मौन साधना से विश्राम के उपरान्त श्रद्धालु भक्तों को भगवान शिव की महिमा के वर्णन से भी अवगत कराते हैं। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि भगवान शिव प्रत्येक भक्त के अंर्तमन में विराजमान हैं। साधना के द्वारा उन्हें जागृत किया जाता है। सच्चे मन से की गयी प्रार्थना अवश्य ही भोलेनाथ के दरबार में पूरी होती हैं। इस अवसर पर पंडित प्रमोद पाण्डे, आचार्य पवनदत्त मिश्र, अंकुश शुक्ला, स्वामी विवेकानन्द ब्रह्मचारी,पंडित शिवकुमार, बालमुकुन्दानन्द ब्रह्मचारी, अनुज दुबे, अनुराग वाजपेयी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

