बागेश्वर ताकुला बसोली रोड के किनारे घास चरने आयी गाय को तेंदुए

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त्तराखंड राज्य में पलायन होने के बाद जंगलों गाय बकरी जाना तो बंद होगया । कुछ लोगों ने अपने गांव में उत्तराखंड की संस्कृति व गाय को गौ माता के तौर पर पाला है ।बाघ के आतंक से सड़कों भी गाय का चरना दुर्लभ हो गया। बागेश्वर ताकुला बसोली रोड के किनारे गाय घास चरने आयी थी। बागेश्वर जिले की व रीठागाड की मात्र शक्ति ने जंगलों से घास काटना बन्द कर दिया ।अगर सड़क के किनारे गाय व‌ बकरी को चराने भेजते हैं तो बाघ के आतंक ने बीच रोड में गाय को को ही पकड लिया। उत्तराखंड सरकार एक तरफ तिरंगा झंडा की बातें कर रही है। लेकिन बाघ के आतंक व उत्तराखंड के पलायन के लिए कोई बात नहीं कर रहे हैं।।

एट दो सालों से बाघ व तेंदुए का आतंक इतना बड गया उत्तराखंड राज्य के लोगों गाय बकरी जंगलो में ले जाना व गाय बकरी को पालने के लिए परेशानियों का सामना हो गया

प्रताप सिंह नेगी समाजिक कार्यकर्ता ने बताया उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को देखकर उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवार जंगलों से घास काटकर अपने गाय भैंसों को नहीं दैगे तो क्या करेंगे।
जंगल जाना नहीं अगर रोड के किनारे गाय भैस को ले जाते हैं तो बाघ व तेंदुए या आदमी को नेवला बनाता है या जानवर को ।
प्रताप सिंह नेगी बताया उत्तराखंड राज्य तो रोजगार के चक्कर में वैसे ही पलायन था। अभी दो साल से बाघ तेंदुए के आतंक से फिर से पलायन होने जा जा रहा है।
उत्तराखंड सरकार को व बन बिभाग को बाघ व तेंदूए के आतंक केलिए कोई न‌ कोई कारवाई करनी चाहिए।

देवभूमि खबर

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