माँ नंदा को समर्पित लोकगीत ‘कुरूड़ की नंदा’ का भव्य विमोचन, लोकगायिका अर्चना सती ने दी आवाज

माँ नंदा को समर्पित लोकगीत ‘कुरूड़ की नंदा’ का भव्य विमोचन, लोकगायिका अर्चना सती ने दी आवाज
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देहरादून। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपराओं और लोक आस्था को समर्पित प्रसिद्ध लोकगायिका अर्चना सती के लोकगीत ‘कुरूड़ की नंदा’ का भव्य विमोचन किया गया। माँ नंदा को समर्पित इस लोकगीत के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

लोकगीत ‘कुरूड़ की नंदा’ में मां नंदा की महिमा और उनके प्रति उत्तराखंडवासियों की गहरी आस्था को स्वर दिया गया है। मां नंदा को उत्तराखंड की अधिष्ठात्री देवी के रूप में जन-जन की आस्था का केंद्र माना जाता है। लोकगीत के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और धार्मिक भावनाओं को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।

विमोचन कार्यक्रम का संचालन युवा कवि अनुज पुरोहित ने किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार मुकेश हटवाल, कर्नल एच.एस. रावत, अध्यक्ष नंदा मेला समिति कुरूड़, सुभाष भट्ट, संस्थापक 4जी मिशन, डॉ. राकेश उनियाल, भगवती प्रसाद, तरुण भंडारी, सतेंद्र कठैत, वंदना, गीतांजलि, नंदिनी, पुष्पा भाकुनी और मधु रावत सहित संस्था के अनेक सदस्य, साहित्यकार, संस्कृति प्रेमी एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।

इस अवसर पर लोकगायिका अर्चना सती ने कहा कि ‘कुरूड़ की नंदा’ केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि मां नंदा के प्रति श्रद्धा, उत्तराखंड की लोक आस्था और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि लोकगीत और लोक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने साहित्य और संस्कृति प्रेमियों से लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे ऐसे प्रयासों से जुड़ने का आह्वान किया।

देवभूमि खबर

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