HTML tutorial
HTML tutorial

हरिद्वार के संतों ने भारतीय सभ्यता को सदैव एक नया रूप प्रदान किया :यातीश्वरनंद

Spread the love

हरिद्वार।देवभूमि खबर। भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के संरक्षण संवर्द्धन में संत समाज ने सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है और हरिद्वार के संतों ने भारतीय सभ्यता को सदैव एक नया रूप प्रदान किया है। उक्त उद्गार ग्रामीण विधायक स्वामी यतीश्वरानन्द महाराज ने आर्यनगर स्थित पातंजल योगधाम आश्रम में आयोजित डा.स्वामी दिव्यानन्द महाराज की श्रद्धांजलि सभा एवं मेधानंद सरस्वती महाराज के पट्टाभिषेक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि महापुरूष केवल शरीर त्यागते हैं। उनकी आत्मा व्यवहारिक रूप से समाज कल्याण के उपस्थित रहती है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी दिव्यानन्द महाराज एक सिद्ध महापुरूष थे। जिन्होंने अपने तप व विद्वता के माध्यम से सनातन धर्म व भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार सम्पूर्ण भारत ही नहीं अपितु विश्व में किया। राष्ट्र निर्माण में उनके अतुल्य योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। यूपी के पूर्व मंत्री स्वामी ओमवेश महाराज ने कहा कि योग्य गुरू को ही सुयोग्य शिष्य की प्राप्ति होती है। ब्रह्मलीन स्वामी दिव्यानन्द महाराज ने गंगा तट से अनेक सेवा के प्रकल्प प्रारम्भ कर गरीब असहाय निर्धन लोगों की सहयता की। हमें आशा है कि उनके कृपापात्र शिष्य स्वामी मेधानंद सरस्वती महाराज उनके बताए मार्ग का अनुसरण कर उनके अधूरे कार्यो को पूर्ण करेंगे। पातंजल योगधाम के नवनियुक्त उत्तराधिकारी स्वामी मेधानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि जो दायित्व संत समाज द्वारा मुझे सौंपा गया है। उसका पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन किया जाएगा। सनातन परंपराओं का निर्वाह करते हुए संत समाज की सेवा कर समाज कल्याण में अपना योगदान पूर्ण रूप से प्रदान किया जाएगा। महंत रघुवीरानंद महाराज ने स्वामी मेधानंद को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। राज्यमंत्री विनोद आर्य ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी दिव्यानंद महाराज समाज के प्रेरणा स्रोत थे। सभी को उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए समाज कल्याण में अपना योगदान करना चाहिए। उनके शिष्य स्वामी मेघानंद सरस्वती उनके अधूरे कार्यो को पूरा करते हुए मानव सेवा में समर्पित रहेंगे। इस अवसर पर स्वामी आर्यवेश, स्वामी विवेकानंद, स्वामी प्रणवानंद, स्वामी सत्यानंद, स्वामी धर्मानंद, डा.सत्यदेव वेदालंकार, डा.मनुदेव बंधु, स्वामी कमलानंद, स्वामी धर्मेश्वरानंद, आचार्य गुरूदत्त आर्य, अंकित आर्य, संसार सिंह, मुकेश आर्य आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

देवभूमि खबर

Related articles