सेवेन सिस्टर्स की तरह हो उत्तराखंड के लिए केंद्रीय बजट में विशेष प्रावधान : गरिमा मेहरा दसौनी

सेवेन सिस्टर्स की तरह हो उत्तराखंड के लिए केंद्रीय बजट में विशेष प्रावधान : गरिमा मेहरा दसौनी
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देहरादून mउत्तराखंड कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने केंद्रीय बजट से पहले राज्य की आवश्यकताओं को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष कुछ अहम मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड लंबे समय से ग्रीन बोनस की मांग करता आ रहा है, जो प्रदेश का हक और अधिकार भी है। उत्तराखंड 71% वन आच्छादित प्रदेश है, जहां फॉरेस्ट एक्ट और एनजीटी के कड़े कानून लागू हैं, जिससे राज्य का विकास बाधित हो रहा है।

गरिमा मेहरा दसौनी ने तुलनात्मक दृष्टि से बताया कि हरियाणा और पंजाब जैसे राज्य मात्र 4% से 5% वन क्षेत्र से आच्छादित हैं, इसलिए वे औद्योगिक रूप से तेजी से प्रगति कर रहे हैं। वहीं, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण के नाम पर कड़े नियमों में जकड़ा हुआ है, जिससे बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है और राज्य की आय के सीमित साधन केवल खनन, शराब और पर्यटन तक ही सीमित हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण में उत्तराखंड के योगदान को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार को प्रदेश के लिए ग्रीन बोनस का प्रावधान करना चाहिए।

उन्होंने इस पर सवाल उठाया कि जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्रीन बोनस की मांग कर रहा है, तो फिर उत्तराखंड इससे वंचित क्यों है? दसौनी ने उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों की तुलना पूर्वोत्तर राज्यों से करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर हिमालयी राज्यों (सेवेन सिस्टर्स) के लिए नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) के तहत विशेष बजट प्रावधान किया जाता है, लेकिन उत्तराखंड को यह लाभ नहीं मिलता। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि उत्तराखंड को भी औद्योगिक पैकेज और विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए, ताकि राज्य के आर्थिक विकास को गति मिल सके।

इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड में अब तक कोई उन्नत साइंस एंड रिसर्च सेंटर स्थापित नहीं किया गया, जहां अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, भूकंप और अन्य आपदाओं की सटीक भविष्यवाणी करने वाली नवीनतम तकनीक विकसित की जा सके। इस कारण प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के प्रयास समय रहते नहीं हो पाते, जिससे राज्य को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

गरिमा मेहरा दसौनी ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्री से अपील की कि वे इस बार के बजट में उत्तराखंड की इन लंबित मांगों को शामिल करें और प्रदेश के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उसे विशेष सहायता प्रदान करें।

देवभूमि खबर

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