यूसीसी के विरोध में उत्तराखंड क्रांति दल की प्रेस वार्ता, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

यूसीसी के विरोध में उत्तराखंड क्रांति दल की प्रेस वार्ता, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
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देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के निवर्तमान युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट ने राज्य में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) को वापस लेने की मांग को लेकर प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी कानून लागू कर उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकारों को खतरे में डाल दिया है।

राजेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन केवल प्रशासनिक जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि धामी सरकार ने यूसीसी लागू कर राज्य के मूल निवासियों की पहचान को कमजोर करने और बाहरी लोगों को बसाने का रास्ता खोल दिया है।

बिष्ट ने दावा किया कि यह कानून लिव-इन रिलेशनशिप को वैधता प्रदान करता है, जिससे उत्तराखंड की संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि इससे बाहरी लोग राज्य में स्थायी निवासी का दर्जा प्राप्त कर भूमि और रोजगार के अधिकार हासिल कर लेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के अवसर सीमित हो जाएंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब उक्रांद ने 1950 के मूल निवास कानून और मजबूत भू-कानून की मांग को लेकर आंदोलन किया, तो सीएम धामी ने दबाव में यूसीसी को स्थगित कर दिया था। लेकिन उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष त्रिवेंद्र पंवार की संदिग्ध मृत्यु के बाद इस कानून को पुनः लागू कर दिया गया।

उक्रांद के केंद्रीय महामंत्री बृज मोहन सजवाण ने कहा कि यूसीसी में किसी भी धर्म विशेष के व्यक्ति के लिए हिंदू लड़कियों से लिव-इन में रहने की कोई बाध्यता नहीं है, जिससे यह कानून महिला सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने इसे प्रदेश में सामाजिक अस्थिरता लाने वाला कदम बताया।

केंद्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश उपाध्याय ने कहा कि यदि यह कानून सभी नागरिकों के समान अधिकारों के लिए है, तो इसे पूरे देश में क्यों नहीं लागू किया गया? उन्होंने कहा कि यह कानून उत्तराखंड के मूल निवास कानून और भू-कानून को कमजोर करने के लिए लाया गया है। उक्रांद इस कानून के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती देगा और राज्यव्यापी आंदोलन करेगा।

यात्रा संयोजक राजेंद्र सिंह बिष्ट ने जनता से आह्वान किया कि वे गुरुकुल नारसन से नीति मलारी गांव तक आयोजित यात्रा में शामिल होकर इस कानून का विरोध करें। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन राज्य की संस्कृति, मूल निवास और अधिकारों को बचाने के लिए जरूरी है।

इस मौके पर केंद्रीय महामंत्री बृज मोहन सजवाण, यात्रा संयोजक राजेंद्र सिंह बिष्ट, दिनेश नेगी, आशुतोष नेगी, भोला प्रसाद चमोली, परवीन चंद रमोला, मनीष रावत, प्रकाश भट्ट, निषित मनराल, सुमित डंगवाल, के एल शाह और जितेंद्र सिंह सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

देवभूमि खबर

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