घोषणाओं का अंबार, नतीजा शून्य: गरिमा मेहरा दसौनी

घोषणाओं का अंबार, नतीजा शून्य: गरिमा मेहरा दसौनी
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देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि उत्तराखंड की स्थिति आज “अंधेर नगरी चौपट राजा” जैसी हो गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा की गई विकास कार्यों की घोषणाओं पर सवाल उठाते हुए बताया कि सरकार की 723 घोषणाओं में से 338 अब भी अधूरी हैं।

बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान गरिमा दसौनी ने कहा कि खुद मुख्यमंत्री के अधीन आठ प्रमुख विभागों की घोषणाओं की यह स्थिति है, जिससे साफ है कि आम गरीब जनता की सुनवाई कितनी हो रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में मुख्य सचिव आनंद वर्धन की समीक्षा बैठक में यह आंकड़े सामने आए, जो शासन की विफलता को दर्शाते हैं।

गरिमा दसौनी ने बताया कि युवा कल्याण, वन एवं पर्यावरण, धर्मस्व, चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण जैसे अहम विभागों में 50 प्रतिशत से अधिक घोषणाएं अधूरी हैं। आंकड़ों के मुताबिक, युवा कल्याण विभाग में 78%, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में 61%, वन एवं पर्यावरण में 58%, खेल विभाग में 44%, समाज कल्याण विभाग में 31% और धर्मस्व विभाग में 51% घोषणाओं पर आज तक अमल नहीं हुआ है। वहीं पेयजल विभाग में 26% घोषणाओं पर ही कार्य प्रगति पर है।

उन्होंने कहा कि अब शासन स्तर पर निर्देश दिए जा रहे हैं कि जो घोषणाएं व्यावहारिक नहीं हैं उन्हें निरस्त कर दिया जाए और जहां धन की कमी है, उन्हें बाह्य सहायता प्राप्त योजनाओं से जोड़ा जाए। इस पर सवाल उठाते हुए गरिमा ने कहा कि यदि घोषणाएं मुख्यमंत्री ने की हैं, तो फिर उन्हें निरस्त करने का अधिकार अधिकारियों को किसने दिया? क्या अब मुख्यमंत्री की घोषणाएं केवल जनता को गुमराह करने का माध्यम रह गई हैं, जिन्हें बाद में अधिकारी अपने विवेक से रद्द कर दें?

गरिमा दसौनी ने तंज कसते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर ही अमल नहीं हो रहा है, तो आम जनता और विपक्ष की बातों को अधिकारी कितनी गंभीरता से लेते होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह सरकार पूरी तरह से दिशाहीन हो चुकी है और शासन-प्रशासन की यह स्थिति प्रदेश के लिए बेहद चिंताजनक है।

देवभूमि खबर

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