उत्तराखंड में धार्मिक आधार पर जनसंख्यकीय बदलाव चिंता का विषय: भगवती प्रसाद राघव, डॉ. देवेंद्र भसीन बोले – राज्य में हो रहा जनसंख्या परिवर्तन एक नियोजित षड्यंत्र
देहरादून। उत्तराखंड में धार्मिक आधार पर हो रहे जनसंख्यकीय बदलाव को लेकर प्रज्ञा प्रवाह देवभूमि विचार मंच ने गहरी चिंता जताई है। मंच की ओर से रविवार को नेहरू कॉलोनी में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य में तेजी से हो रहे पलायन और धार्मिक जनसंख्या परिवर्तन के प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संयोजक भगवती प्रसाद राघव ने कहा कि राज्य में जिस प्रकार जनसंख्या का धार्मिक संतुलन बदल रहा है, वह देवभूमि की सांस्कृतिक अस्मिता के लिए खतरे का संकेत है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सामाजिक परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान और आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति है।
राघव ने कहा कि उत्तराखंड में इन बदलावों के पीछे कौन-से कारण हैं, इसके लिए शिक्षाविदों, समाजशास्त्रियों और नीति-विशेषज्ञों द्वारा गहन अध्ययन की आवश्यकता है, ताकि इनका समाधान निकाला जा सके।
बैठक में उत्तराखंड उच्च शिक्षा उन्नयन परिषद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र भसीन ने कहा कि राज्य में धार्मिक आधार पर हो रहे जनसंख्यकीय परिवर्तन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे एक नियोजित षड्यंत्र करार देते हुए कहा कि,
“जब राज्य शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तो कुछ क्षेत्रों में आबादी का असामान्य रूप से बढ़ना कई सवाल खड़े करता है। यह बदलाव स्वाभाविक नहीं लगता।”
भसीन ने इस मुद्दे पर गंभीर शोध और तथ्यपरक विश्लेषण की आवश्यकता जताई, ताकि भविष्य में सामाजिक और सांस्कृतिक असंतुलन से बचा जा सके।
बैठक में प्रज्ञा प्रवाह अध्ययन परिषद के सदस्य श्री विकास सारस्वत ने कहा कि इस विषय पर गहन एवं प्रमाणिक अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि जल्द ही एक दिवसीय शोध प्रविधि कार्यशाला आयोजित की जाए, जिसमें विशेषज्ञ जनसंख्या बदलाव के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखें।
बैठक के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य में धार्मिक जनसंख्यकीय बदलाव का अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक ताना-बाना, सांस्कृतिक विरासत और सामरिक दृष्टिकोण से अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए देशभर के विशेषज्ञों से शोध लेख आमंत्रित किए जाएंगे, जो इस विषय पर गहन दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सकें।
बैठक में प्रमुख रूप से डॉ. रवि दीक्षित, प्रोफेसर अजय प्रताप सिंह, डॉ. कृष्ण चंद्र मिश्रा, श्री विशाल, श्री सुमित प्रसाद और प्रोफेसर एच.सी. पुरोहित उपस्थित रहे।

