
पिथौरागढ़। जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने दो अलग-अलग दुर्घटनाओं के कारणों की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश जारी किए हैं।
पहले मामले में ग्राम भटयूडा, तहसील व जनपद पिथौरागढ़ निवासी जयन्ती देवी द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के आधार पर उनके पति अर्जुन राम की डूबकर मृत्यु की घटना की जांच हेतु उपजिला मजिस्ट्रेट, पिथौरागढ़ को जांच अधिकारी नामित किया गया है। यह घटना 13 अगस्त 2024 को रामेश्वर घाट में शवयात्रा के दौरान हुई थी, जिसमें डूबने के बाद से मृतक का कोई पता नहीं चल पाया है।
दूसरे मामले में ग्राम डुंडुं निवासी सुन्दर सिंह अन्ना द्वारा दिए गए आवेदन पर, ग्राम सभा डोडा के चकद्वारी तोक निवासी शोबन सिंह के 21 जुलाई 2025 को चट्टान से फिसलकर काली नदी में गिरने और बह जाने की घटना की जांच हेतु उपजिला मजिस्ट्रेट, डीडीहाट को जांच अधिकारी नामित किया गया है। दोनों जांच अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जांच पूरी कर मजिस्ट्रीयल जांच आख्या जिलाधिकारी को प्रस्तुत करें।
इसी क्रम में उत्तराखण्ड पशु कल्याण बोर्ड, देहरादून द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत गंगोलीहाट स्थित हाट कालिका मंदिर परिसर में पशु बलि निवारण जन चेतना गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष विमल रावल, क्षेत्र प्रमुख विनोद प्रसाद, मंदिर समिति अध्यक्ष हरगोविंद रावल, पुजारी दीप चंद्र पंत, रामलीला कमेटी के हेमराज रावल सहित विभागीय अधिकारी, उपजिलाधिकारी गंगोलीहाट यशवीर सिंह, डॉ. मंजू असवाल, पशु चिकित्साधिकारी, पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
गोष्ठी में पशु बलि न करने के संबंध में व्यापक जन जागरूकता पर बल दिया गया। नगरपालिका अध्यक्ष, क्षेत्र प्रमुख व मंदिर पुजारी ने इस विषय पर अपने विचार रखे। उपजिलाधिकारी ने उपस्थित लोगों को आईपीसी/भारतीय न्याय संहिता तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धाराओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नए प्रावधानों के तहत पशु बलि करने पर आपराधिक कानून की धारा 325 के अंतर्गत पाँच साल तक की सजा का प्रावधान है।

