उपनलकर्मियों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना करवाए राजभवन – मोर्चा

उपनलकर्मियों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना करवाए राजभवन – मोर्चा
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सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन भी हो चुकी सरकार की खारिज।

कमेटियाँ बनाकर टाइमपास कर रही सरकार

।संवेदनशील मामले में राजभवन की खामोशी पर सवाल

विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि उपनलकर्मियों के हित में आए उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सरकार लगातार टालमटोल कर रही है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि सरकार द्वारा उपनलकर्मियों को नियमितीकरण और अन्य लाभ दिए जाने के खिलाफ दायर की गई एसएलपी को सर्वोच्च न्यायालय 15 अक्टूबर 2024 को पहले ही खारिज कर चुका है। इसके बावजूद सरकार ने 08 नवम्बर 2024 को रिव्यू पिटीशन दायर कर कर्मचारियों के भविष्य पर अनिश्चितता बढ़ा दी थी, जबकि यह रिव्यू पिटीशन भी 11 नवम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई है।

नेगी ने कहा कि अब जबकि उच्चतम न्यायालय के दोनों स्तरों पर मामले का पटाक्षेप हो चुका है, सरकार का दायित्व बनता है कि तत्काल उच्च न्यायालय के 12 नवम्बर 2018 के आदेश के अनुसार उपनल कर्मियों को नियमितीकरण व अन्य देय लाभ प्रदान करे। लेकिन सरकार कमेटियाँ गठित कर केवल समय व्यतीत करने की नीति अपना रही है।

नेगी ने कहा कि उपनलकर्मी लगभग एक सप्ताह से उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना की मांग को लेकर आंदोलित हैं, पर राजभवन की चुप्पी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मामले में राज्यपाल का दायित्व बनता है कि वे सरकार को तत्काल न्यायालयीय आदेशों के अनुपालन के निर्देश दें और आंदोलनरत उपनल कर्मियों की मांगों पर संज्ञान लें।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश का दुर्भाग्य है कि जहां विधायक और मंत्री सरकारी सेवक न होते हुए भी लाखों रुपये वेतन-भत्ते के रूप में ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों से सेवा दे रहे उपनल कर्मियों को उनका अधिकार देने में सरकार कंजूसी कर रही है।

मोर्चा ने राजभवन से मांग की है कि वह उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने हेतु सरकार को कठोर निर्देश दे।

पत्रकार वार्ता में भीम सिंह बिष्ट और अतुल हांडा भी मौजूद रहे।

देवभूमि खबर

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