जिला विकास प्राधिकरण की भेदभाव पूर्वक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं करेंगे ओम गोपाल रावत
टिहरी ।जिला विकास प्राधिकरण की कथित मनमानी और भेदभावपूर्ण कार्यवाही के खिलाफ कांग्रेस के एक शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। शिष्टमंडल का नेतृत्व नरेंद्र नगर के पूर्व विधायक ओम गोपाल सिंह रावत ने किया। उनके साथ पूर्व प्रमुख वीरेंद्र सिंह कंडारी, जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी गढ़वाल के अध्यक्ष राकेश राणा तथा वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह भंडारी भी मौजूद रहे।
पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत ने कहा कि टिहरी जिले के नरेंद्रनगर, तपोवन, ढालवाला, मुनि की रेती सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में जिला विकास प्राधिकरण की कार्यशैली अत्यंत चिंताजनक हो गई है। प्राधिकरण की कार्रवाई कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित होकर रह गई है और केवल उन्हीं नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है जो या तो रिश्वत नहीं दे पा रहे हैं या जिनकी कोई राजनीतिक पकड़ नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र सिंह कंडारी ने तपोवन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि प्राधिकरण द्वारा समय पर घरातलीय निरीक्षण किया गया होता तो मात्र आठ फीट चौड़ी गली में छह मंजिला इमारत का निर्माण संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि एक ही स्थान पर दो अलग-अलग प्रकार की कार्रवाई होना और उसी जगह पर एक व्यक्ति को छह मंजिला भवन बनाने की अनुमति मिल जाना, जबकि दूसरे को एक मंजिला भवन भी बनाने से रोका जाना, अवैध वसूली का स्पष्ट प्रमाण है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश राणा और वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि तपोवन में एक भवन पर सीलिंग के आदेश होने के बावजूद वह भवन होटल के रूप में तैयार हो जाना गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य विकास कार्यों को गति देना होना चाहिए, न कि अवैध वसूली में लिप्त होना।
शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी के समक्ष मांग रखी कि प्राधिकरण की नियमावली सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू की जाए और भेदभावपूर्ण कार्रवाई पूरी तरह बंद हो। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि कोई व्यक्ति अपना पुराना भवन तोड़कर नया निर्माण करना चाहता है तो उसे उचित छूट दी जाए। आधे-अधूरे बने भवनों को वन टाइम सेटलमेंट के तहत पूरा कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। साथ ही लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को शीघ्र लागू करने तथा वर्ष 1960 से लंबित राजस्व अभिलेखों के दुरस्तीकरण की मांग भी की गई।
शिष्टमंडल ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों को क्षेत्रीय निरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से दूर रखा जाए। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी डेपुटेशन पर है और उस पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, तो उसे उसके मूल कैडर में वापस भेजते समय उसके प्रोग्रेस कार्ड में कारण अंकित किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक लग सके। साथ ही प्राधिकरण को चाहिए कि वह लोगों को भवन निर्माण में सुरक्षा उपायों और सही मार्गदर्शन की जानकारी देकर एक सहयोगात्मक वातावरण बनाए।
शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि इन सभी मांगों पर गंभीरता से संज्ञान लिया जाए और स्वयं स्थलीय निरीक्षण किया जाए। चेतावनी दी गई कि यदि प्राधिकरण की दोषपूर्ण कार्यवाही इसी तरह जारी रही तो कांग्रेस को आमरण अनशन, क्रमिक अनशन और आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला स्तरीय प्राधिकरण की होगी।
इस अवसर पर शिष्टमंडल में नरेंद्र नगर के पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत, जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी गढ़वाल के पूर्व अध्यक्ष राकेश राणा, पूर्व प्रमुख वीरेंद्र सिंह कंडारी, जगमोहन सिंह भंडारी, प्रदेश कांग्रेस सचिव सैयद मुसर्रफ अली, महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष आशा रावत, अनिल भंडारी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अनुराग पयाल, नवीन भंडारी, अनिल रावत, लेखराज भंडारी, रतन सिंह नेगी, संजय पयाल, गिरीश बिष्ट, चैन सिंह बिष्ट, देशराज भंडारी, यशपाल भंडारी, नरेंद्र केंतुरा, मुन्ना सिंह रावत सहित बड़ी संख्या में व्यापार मंडल और नगर पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

