उत्तराखण्ड भेड़ एवं ऊन विकास बोर्ड द्वारा ऊन क्रेता–विक्रेता बैठक आयोजित, 75 भेड़ पालकों ने किया प्रतिभाग

उत्तराखण्ड भेड़ एवं ऊन विकास बोर्ड द्वारा ऊन क्रेता–विक्रेता बैठक आयोजित, 75 भेड़ पालकों ने किया प्रतिभाग
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देहरादून।उत्तराखण्ड भेड़ एवं ऊन विकास बोर्ड (यूएसडब्ल्यूडीबी), देहरादून द्वारा केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड, जोधपुर (CWDB) के सहयोग से किसान भवन, देहरादून में ऊन क्रेता–विक्रेता बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बागेश्वर, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी एवं देहरादून जनपदों से लगभग 75 भेड़ पालकों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में उपस्थित भेड़ पालकों द्वारा सर्वसम्मति से श्री उमराव सिंह चौहान को अध्यक्ष चुना गया। बैठक का औपचारिक उद्घाटन मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. जी.एस. खड़ायत एवं श्री उमराव सिंह चौहान द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।


बैठक का उद्देश्य प्रदेश के ऊन उत्पादक भेड़ पालकों को सीधे क्रेताओं से जोड़ना था, ताकि उन्हें अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सके तथा बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। कार्यक्रम में बोर्ड की भूमिका, ऊन विपणन के विभिन्न माध्यमों तथा कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से मिलने वाले लाभों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

संयुक्त निदेशक डॉ. अशोक लीलाधर बिष्ट ने बोर्ड की योजनाओं की जानकारी साझा की। पशुपालन विभाग द्वारा संचालित भेड़ एवं बकरी विकास कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में एफपीओ प्रतिनिधि श्री कपूरवान ने बताया कि वर्तमान में 10 एफपीओ से लगभग 2300 भेड़ पालक जुड़े हुए हैं।

सीड एंड ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन ऑर्गनाइजेशन के संयुक्त निदेशक डॉ. एच.सी. साकवा ने जैविक प्रमाणन एवं उससे होने वाले लाभों पर जानकारी दी। सहायक ऊन विश्लेषण अधिकारी श्री राजेंद्र सिंह ने ऊन की सैंपलिंग की प्रक्रिया एवं उसके महत्व पर प्रकाश डाला। टेक्सटाइल एक्सचेंज एवं अन्य एजेंसियों द्वारा विभिन्न प्रमाणपत्रों (RAS, RMS, RWS आदि) की उपयोगिता और महत्व की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी गई।

बैठक में विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों ने बाजार की आवश्यकताओं एवं गुणवत्ता मानकों की जानकारी दी, जिससे भेड़ पालकों को उत्पादन एवं आपूर्ति की दिशा में मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। भेड़ पालकों ने प्रवास के दौरान वन विभाग द्वारा समय पर परमिट जारी न किए जाने की समस्या भी उठाई।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. पूर्णिमा बंगोला, उपनिदेशक द्वारा किया गया। उपस्थित भेड़ पालकों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार की बैठकों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।

देवभूमि खबर

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