देहरादून में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर नागरिक संगठनों की चिंता, ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ और सख्त कदमों की मांग

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देहरादून। संयुक्त नागरिक संगठन देहरादून ने राजधानी में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए लगातार दो दिनों तक ऑनलाइन संवाद आयोजित किया। संवाद में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने कानून व्यवस्था में सुधार हेतु कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
संवाद में शामिल सदस्यों का मत था कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव द्वारा जारी निर्देश अपराधियों में अपेक्षित भय उत्पन्न करने में पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ की अवधारणा के तहत सख्त, संवेदनशील, आधुनिक, मोबाइल, सतर्क, जवाबदेह और तकनीकी रूप से सक्षम पुलिस व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

अवधेश शर्मा ने शराबखानों, होटलों, मॉल और रिसॉर्ट्स में रात्रि 10 बजे के बाद शराब परोसने पर रोक लगाने की मांग की। हरेंद्र सिंह रावत ने हालिया आपराधिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

मधु त्यागी ने सभी मदिरालयों के संचालन समय को रात्रि 10 बजे तक सीमित करने का सुझाव दिया, जबकि नरेश चंद्र कुलश्रेष्ठ ने छात्रावासों और शिक्षण संस्थानों में नशीले पदार्थों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए संचालकों और मकान मालिकों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
वीरू बिष्ट ने ‘मित्र पुलिस’ के बजाय अपराधियों के प्रति सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता बताई। डॉ. अजीत गैरोला ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ते पर्यटन के दबाव को ध्यान में रखते हुए नियंत्रित पर्यटन नीति अपनाने का सुझाव दिया।

रविंद्र सिंह गुसाईं ने पुलिस और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया, जबकि जगमोहन मेहंदीरा ने बाहरी व्यक्तियों के शत-प्रतिशत सत्यापन और 24 घंटे पुलिस पेट्रोलिंग की आवश्यकता बताई।

इसके अलावा, सीसीटीवी निगरानी, स्पीड डिस्प्ले बोर्ड, शराब पीकर वाहन चलाने वालों के लाइसेंस निरस्त करने और पीसीआर के माध्यम से नियमित निगरानी जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करने की मांग उठाई गई।

संगठन के सदस्यों ने यह भी कहा कि पुलिस विभाग में कार्मिकों और आधुनिक संसाधनों की कमी है तथा गृह विभाग स्तर पर आवश्यक प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय लिया जाना जरूरी है, जिससे राजधानी में कानून व्यवस्था को प्रभावी ढंग से सुदृढ़ किया जा सके।

देवभूमि खबर

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