सतत लॉजिस्टिक्स एवं अवसंरचना नियोजन के लिए अंतरविभागीय समन्वय अत्यंत आवश्यक : प्रो. सुरेखा डंगवाल
देहरादून।दून विश्वविद्यालय में 25 एवं 26 मई, 2026 को पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पर आधारित दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम (Capacity Building Programme – CBP) का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का संयुक्त रूप से आयोजन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन लॉजिस्टिक्स एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट (CoE-LSCM), दून विश्वविद्यालय तथा सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस (CPPGG), नियोजन विभाग, उत्तराखंड सरकार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों को एकीकृत अवसंरचना नियोजन, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स प्रबंधन एवं जियोस्पेशियल गवर्नेंस के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान करना था। कार्यशाला में नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लेते हुए उत्तराखंड में सतत विकास हेतु समन्वित एवं तकनीक-आधारित नियोजन पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन लॉजिस्टिक्स एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट द्वारा आयोजित प्रथम पीएम गति शक्ति कार्यशाला की कार्यवाही प्रस्तुति के साथ हुआ।
उद्घाटन सत्र में पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह पहल विभिन्न विभागों के बीच समन्वित योजना निर्माण एवं अवसंरचना परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. मनोज पंत, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, CPPGG ने पीएम गति शक्ति पोर्टल का विस्तृत परिचय देते हुए इसकी उपयोगिता विभिन्न विभागों के संदर्भ में समझाई। उन्होंने बताया कि यह पोर्टल विभिन्न विभागों के डेटा लेयर्स को एक मंच पर एकीकृत कर बेहतर समन्वय, परियोजनाओं में देरी की कमी तथा पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में सहायक है। उन्होंने सतत एवं समावेशी विकास के लिए सहयोगात्मक नियोजन की आवश्यकता पर भी बल दिया।
द्वितीय सत्र में डॉ. सुधांशु जोशी, समन्वयक, CoE-LSCM एवं श्री ऐश्वर्या अवनीश ने लॉजिस्टिक्स एवं सप्लाई चेन प्रबंधन के संदर्भ में पीएम गति शक्ति की रणनीतिक भूमिका पर चर्चा की।
वक्ताओं ने बताया कि एकीकृत लॉजिस्टिक्स नियोजन से कनेक्टिविटी मजबूत होती है, अवसंरचना नेटवर्क का विकास होता है तथा उत्तराखंड जैसे भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में आर्थिक विकास को गति मिलती है। सत्र में डेटा आधारित प्रशासन, मल्टीमॉडल परिवहन प्रणाली तथा डिजिटल अवसंरचना की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसके पश्चात श्री नवराज छेत्री एवं श्री कैलाश रावत द्वारा जियोस्पेशियल तकनीकों, GIS आधारित नियोजन उपकरणों तथा पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पोर्टल के व्यावहारिक उपयोगों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को अवसंरचना अंतराल की पहचान, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क नियोजन तथा विभिन्न विभागों के डेटा एकीकरण के माध्यम से साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के दौरान हैंड्स-ऑन लैब सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागियों को पीएम गति शक्ति पोर्टल एवं उसकी विश्लेषणात्मक विशेषताओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
अधिकारियों ने स्पेशियल मैपिंग, अवसंरचना आकलन तथा योजना निर्माण से संबंधित अभ्यासों में सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम में एक रोचक क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन श्री अक्षय जायसवाल द्वारा Scenario-Based Planning Exercises पर इंटरैक्टिव चर्चा एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित की गई। इस सत्र में डिजिटल उपकरणों एवं जियोस्पेशियल डेटा के माध्यम से विभिन्न अवसंरचना परिदृश्यों के विश्लेषण एवं नियोजन की व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने विभागीय समन्वय, डेटा-आधारित निर्णय निर्माण एवं सतत विकास हेतु प्रभावी अवसंरचना नियोजन से जुड़े अभ्यासों में सक्रिय सहभागिता की। इसके अतिरिक्त प्रशासन एवं अवसंरचना नियोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग जैसी उभरती तकनीकों की भूमिका पर भी विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की गई।
इन सत्रों में नीति निर्माण, पूर्वानुमान विश्लेषण तथा नियोजन दक्षता बढ़ाने में आधुनिक तकनीकों के महत्व को रेखांकित किया गया। भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS) के डॉ. कमल पांडेय द्वारा “Understanding Departmental GIS Database Creation: A Line Department User Perspective” विषय पर विशेष हैंड्स-ऑन लैब सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में GIS डेटाबेस निर्माण, जियोस्पेशियल डेटा प्रबंधन एवं विभागीय नियोजन में उसके उपयोग पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
उत्तराखंड सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्यशाला से उन्हें एकीकृत नियोजन, डिजिटल गवर्नेंस एवं पीएम गति शक्ति पोर्टल के व्यावहारिक उपयोगों की बेहतर समझ प्राप्त हुई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर बधाई देते हुए दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि “सतत लॉजिस्टिक्स एवं अवसंरचना नियोजन के लिए अंतरविभागीय समन्वय अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने CoE-LSCM एवं CPPGG को सरकारी अधिकारियों के लिए पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पर द्वितीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु बधाई दी तथा भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से संस्थागत क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ।
समापन सत्र में डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. एच.सी. पुरोहित, डॉ. नरेश चंद्र, स्टेट नोडल अधिकारी, PMGS, एवं डॉ. अजय कुक्साल उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम दून विश्वविद्यालय, CoE-LSCM एवं CPPGG की एकीकृत प्रशासन, सतत अवसंरचना विकास एवं नवाचार-आधारित सार्वजनिक नीति नियोजन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

