शिक्षा विभाग ने इंडिया ग्लाइकोल्स और तकनीकी शिक्षा विभाग के साथ किया एमओयू, सरकारी स्कूलों में मजबूत होगा शैक्षिक ढांचा
देहरादून, 30 मई। प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा विद्यार्थियों को आधुनिक एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विद्यालयी शिक्षा विभाग ने दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें एक एमओयू इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड, काशीपुर तथा दूसरा प्राविधिक शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड के साथ किया गया है।
एससीईआरटी सभागार, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में विद्यालयी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत की अध्यक्षता में हुए इन समझौतों को शिक्षा क्षेत्र में नई पहल माना जा रहा है। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उसे कौशल, तकनीक और रोजगार से जोड़ना है, ताकि विद्यार्थी स्कूली स्तर से ही अपने भविष्य के लिए तैयार हो सकें।
उन्होंने बताया कि प्राविधिक शिक्षा विभाग के साथ हुए समझौते के तहत प्रदेश के राजकीय विद्यालयों एवं इंटर कॉलेजों को निकटवर्ती राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों से जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों में तकनीकी शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और उन्हें बेहतर करियर अवसर प्राप्त होंगे। कक्षा 10 उत्तीर्ण विद्यार्थियों को डिप्लोमा प्रथम वर्ष तथा भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित विषयों के साथ कक्षा 12 उत्तीर्ण विद्यार्थियों को लेटरल एंट्री के माध्यम से डिप्लोमा द्वितीय वर्ष में प्रवेश का अवसर मिलेगा।
डॉ. रावत ने कहा कि यह पहल राज्य में तकनीकी शिक्षा के विस्तार, पॉलीटेक्निक संस्थानों में छात्र संख्या बढ़ाने और युवाओं को रोजगारपरक पाठ्यक्रमों से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगी। साथ ही उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
शिक्षा विभाग और इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड के बीच हुए समझौते के तहत कंपनी अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में शैक्षिक आधारभूत सुविधाओं के विकास में सहयोग करेगी। इसके अंतर्गत डिजिटल एवं तकनीक आधारित शिक्षण प्रणाली को बढ़ावा देने, शिक्षकों के क्षमता विकास कार्यक्रम संचालित करने तथा सुरक्षित, समावेशी और बाल-अनुकूल शिक्षण वातावरण विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार, कौशल विकास और अकादमिक उत्कृष्टता के मॉडल संस्थानों के रूप में विकसित करना है। इन समझौतों से प्रदेश की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी और विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी एवं आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, निदेशक प्राविधिक शिक्षा देशराज, निदेशक एससीईआरटी वंदना गर्ब्याल, सचिव यूबीटीआर डॉ. मुकेश पाण्डेय, प्रभारी निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती, संयुक्त निदेशक आलोक मिश्रा तथा इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड के प्रमुख प्रशासन राजेश कुमार सिंह सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

