उत्तराखंड में माफिया राज, अधिकारी की जान को खतरा; सरकार बताए खनन माफियाओं पर कार्रवाई क्यों नहीं: गरिमा मेहरा दसौनी
देहरादून। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने चकराता वन प्रभाग के उप प्रभागीय वन अधिकारी राजीव नयन नौटियाल द्वारा अपनी सुरक्षा की मांग किए जाने के मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह उत्तराखंड में कानून व्यवस्था और शासन व्यवस्था की चिंताजनक स्थिति को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि जब अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने वाला एक जिम्मेदार अधिकारी स्वयं अपनी जान को खतरा बताकर सुरक्षा की मांग करने को मजबूर हो जाए, तो यह प्रदेश में खनन माफियाओं के बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट संकेत है।
दसौनी ने कहा कि लंबे समय से सुरक्षा की मांग के बावजूद अधिकारी को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई, जो सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में अवैध खनन माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद हुए हैं और प्रदेश की नदियों, जंगलों तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि यदि एक सरकारी अधिकारी ही स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहा है तो आम जनता की सुरक्षा का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध खनन का मुद्दा केवल कांग्रेस ही नहीं उठा रही, बल्कि भाजपा के भीतर से भी इस पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुन्ना सिंह चौहान तथा अरविंद पांडे भी विभिन्न अवसरों पर अवैध खनन को लेकर चिंता जता चुके हैं।
कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारी असुरक्षित क्यों हैं और खनन माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने में आखिर किसका दबाव काम कर रहा है। गरिमा मेहरा दसौनी ने मांग की कि राजीव नयन नौटियाल को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए, उन्हें मिल रही धमकियों एवं कथित हमले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा प्रदेश में सक्रिय अवैध खनन नेटवर्क और उसके संरक्षणकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को माफियाओं के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता और कांग्रेस इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करती है।

