हिन्दू अध्ययन: भारतीय ज्ञान परंपरा से व्यक्तित्व विकास और रोजगार के नए अवसरों का सेतु:प्रो. एच.सी. पुरोहित

देहरादून। दून विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के डीन एवं सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज के समन्वयक प्रो. एच.सी. पुरोहित ने कहा है कि हिन्दू अध्ययन आज केवल धार्मिक अध्ययन तक सीमित विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के व्यक्तित्व विकास, नैतिक नेतृत्व, तार्किक चिंतन और रोजगारोन्मुख शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
उन्होंने बताया कि दून विश्वविद्यालय सहित देश और विदेश के तीन दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थानों में संचालित हिन्दू अध्ययन पाठ्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों में जीवन मूल्यों, आत्मविश्वास, सृजनशीलता और सकारात्मक सोच का विकास कर रहा है। यह पाठ्यक्रम व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में धैर्य, संतुलन और कर्तव्यबोध के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
प्रो. पुरोहित के अनुसार हिन्दू अध्ययन धर्मगुरुओं या कर्मकाण्ड विशेषज्ञों तक सीमित नहीं है। यह विषय मंदिर एवं तीर्थ प्रबंधन, धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक संस्थानों के संचालन, शोध, अध्यापन, अनुवाद, प्रकाशन, संग्रहालय, अभिलेखागार, डिजिटल कंटेंट निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर जैसे बड़े धार्मिक संस्थानों के आधुनिक प्रबंधन में भी इस विषय के प्रशिक्षित युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
उन्होंने बताया कि दून विश्वविद्यालय ने हिन्दू अध्ययन को व्यवहारिक और रोजगारोन्मुख स्वरूप प्रदान किया है। इसके अलावा देश के अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक अध्ययन, संस्कृत, भारतीय दर्शन और संस्कृति से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। वहीं अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और नीदरलैंड सहित कई देशों के विश्वविद्यालयों में भी हिन्दू स्टडीज, इंडिक स्टडीज, योग, वेद, उपनिषद और भारतीय दर्शन पर गंभीर अध्ययन एवं शोध किए जा रहे हैं।
प्रो. पुरोहित ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लागू होने के बाद भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित शिक्षा को नई गति मिली है, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार और शोध के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारतीय जीवन-दर्शन, योग, आयुर्वेद, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों को समझने में रुचि दिखा रही है। ऐसे में हिन्दू अध्ययन भारत की सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में हिन्दू अध्ययन उच्च शिक्षा का एक महत्वपूर्ण विषय बनने के साथ-साथ युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण की भावना को भी सशक्त करेगा।

