वैश्विक शांति एवं समृद्धि भारतीय ज्ञान और दर्शन से संभव: प्रोफेसर पुरोहित

देहरादून।देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं प्रबंधन के भविष्य’ विषय पर विचार प्रकट करते हुए दून विश्वविद्यालय देहरादून के प्रबंध संकाय के अध्यक्ष एवं सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज के समन्वयक प्रोफेसर एच सी पुरोहित ने कहा कि विश्व आज एक अनिश्चित और चुनौती पूर्ण दौर से गुजर रहा है । अमेरिका को हॉर्मुज पर हिस्सेदारी चाहिए, रूस और यूक्रेन एक अंतहीन युद्ध में उलझे हुए हैं, और उसी में किसी न किसी तरह से चीन सहित विश्व की अन्य शक्तियां भी घिरी हुई है, सब की कोशिश है कि किसी भी तरह संसाधनों का अत्यधिक विदोहन कर अपनी शक्ति को बढ़ाना है, ऐसे दौर में विश्व शांति और पर्यावरण संतुलन जैसे वैश्विक विषयों पर विमर्श और सहमति कैसे स्थापित हो पाएगी, यह एक चिंतनीय विषय है।
प्रो पुरोहित ने कहा कि दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां खाद्यान्न का संकट है, पीने के पानी का संकट है, उनके दर्द को इस वर्चस्ववाद के अंतहीन संघर्ष से मुक्ति यदि कभी मिलेगी तो वह सिर्फ भारतीय ज्ञान दर्शन को अपनाने से ही मिल पाएगी । क्योंकि भारतीय दर्शन ‘विश्व बंधुत्व’ और ‘सर्वे भवंतु सुखिन’ के मंत्र पर आधारित है। यह सब के कल्याण के लिए एवं सार्वभौमिक शांति और समृद्धि की कामना से प्रेरित है । इसलिए प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में नहीं बल्कि सभी विषयों में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश किया जाना आवश्यक है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के तहत पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रावधान युवाओं को नए रूप में तैयार करेगा जिससे वे विश्व को राह दिखाने की दिशा में प्रेरित होंगे। सही मायने में सतत विकास का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए इकोनामी मॉडल को अपनाना होगा और यह सीख भारतीय दर्शन से ही प्रेरित होकर विश्व समुदाय को कल्याण के मार्ग पर ले जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन संयोजक के डॉक्टर शिखा भास्कर ने किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

