दो दशक से कर्णप्रयाग सीएचसी में स्वीकृत विशेषज्ञ फिजीशियन की तैनाती नहीं

कर्णप्रयाग।देवभूमि खबर। बदरीनाथ व हेमकुंड यात्रा मार्ग पर तीर्थ यात्रियों सहित क्षेत्रवासियों को स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र वर्षो से विशेषज्ञ चिकित्सकों के इंतजार में है। बीते दो दशक से यहां स्वीकृत विशेषज्ञ फिजीशियन की तैनाती भी नहीं हो सकी। जिससे सीएचसी कर्णप्रयाग पहुंचने वाले गंभीर रूप से बीमार मरीज को हायर सेंटर ले जाना पड़ता हैं। स्थानीय लोगों की मांग पर यहां ट्रॉमा सेंटर भवन तैयार किया गया। लेकिन बीते दस वर्ष से इस भवन में सिवाय आपदा प्रभावितों को मुआवजा वितरण या स्वास्थ्य शिविर आयोजन के कुछ और नहीं हो सका। ट्रॉमा सेंटर संचालन की अनुमति शासन स्तर से लंबित है, जो आने वाले ग्राम पंचायत चुनावों में क्षेत्रवासियों के लिए मुद्दा रहेगा। अस्पताल प्रशासन के आंकड़ों पर गौर करें तो सीएचसी में फिजीशियन व रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती वर्ष 2000 से नहीं हो सकी है। जबकि तैनात शल्य चिकित्सक व महिला चिकित्सक के उत्तर प्रदेश कैडर का होने के चलते दो माह पूर्व उनके तबादले का आदेश मिल चुका है। हालांकि क्षेत्रीय जनता के दबाव के बाद शासन ने स्थानान्तरित चिकित्सकों के प्रतिनियुक्ति संबंधी पत्रावलियां भी जमा करने के निर्देश जारी किए हैं। यात्राकाल के दौरान आकस्मिक स्वास्थ्य सुविधाएं तब बुरी तरह लडखड़ा जाती हैं जब कोई वाहन दुर्घटना क्षेत्र में घटित होती है। नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र होने के चलते घायल अस्पताल पहुंचता है। ऐसी स्थिति में यहां न तो ब्लड बैंक की सुविधा होती है और ना ही आर्थोपेडिक सर्जन की। चिकित्सकों की तैनाती न होने के कारण घायल को रेफर करना ही मजबूरी होती है। देशी-विदेशी यात्रियों सहित गैरसैंण, थराली, नारायणबगड़, घाट, देवाल से हर रोज सैकड़ों की संख्या में यहां मरीज पहुंचते हैं।

