‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ₹4.35 लाख की ठगी, टिहरी पुलिस ने महाराष्ट्र से साइबर ठग को दबोचा

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ₹4.35 लाख की ठगी, टिहरी पुलिस ने महाराष्ट्र से साइबर ठग को दबोचा
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टिहरी । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे के नेतृत्व में टिहरी पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर ₹4.35 लाख की ठगी करने वाले एक शातिर साइबर अपराधी को महाराष्ट्र के सतारा जिले से गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, ढालवाला निवासी एक व्यक्ति से जनवरी 2026 में व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी बताकर संपर्क किया गया। ठगों ने फर्जी पुलिस कार्यालय और वर्दीधारी अधिकारियों के दृश्य दिखाकर पीड़ित को विश्वास में लिया तथा मुंबई में उसके नाम से बैंक खाता खुलने और उसमें आपराधिक गतिविधियों का इस्तेमाल होने का झांसा देकर गिरफ्तारी का डर दिखाया। मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने 13 जनवरी 2026 को आरोपियों के बताए बैंक खाते में ₹4.35 लाख जमा कर दिए।

शिकायत के आधार पर थाना मुनिकीरेती में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की जांच साइबर सेल को सौंपी गई। तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच के बाद पुलिस ने न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त कर महाराष्ट्र में दबिश दी।

23 जुलाई 2026 को संयुक्त पुलिस टीम ने महाराष्ट्र के जिला सतारा निवासी अंकुश राजेन्द्र गाडगे को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह USDT (क्रिप्टोकरेंसी) ट्रेडिंग के माध्यम से साइबर ठगी की रकम को विभिन्न खातों से क्रिप्टो में बदलकर आगे ट्रांसफर करता था और इसके बदले कमीशन प्राप्त करता था।

पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर वैधानिक कार्रवाई की है। मामले में शामिल अन्य आरोपियों और पूरे साइबर नेटवर्क की तलाश जारी है।

एसएसपी श्वेता चौबे ने जनता से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाए या पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाए, तो घबराएं नहीं। किसी भी प्रकार की धनराशि ट्रांसफर न करें और तुरंत �⁠साइबर हेल्पलाइन **1930** या �⁠www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

इस कार्रवाई को सफल बनाने में साइबर सेल के उपनिरीक्षक संजीव थपलियाल, थाना मुनिकीरेती के अपर उपनिरीक्षक हरिमोहन तथा हेड कांस्टेबल विजय प्रताप की संयुक्त पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसने तकनीकी सर्विलांस, पतारसी और सुरागरसी के आधार पर महाराष्ट्र के सतारा जिले से आरोपी को गिरफ्तार किया।

देवभूमि खबर

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