रिश्वत कांड में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 3.50 करोड़ की चल-अचल संपत्तियां कुर्क

गुवाहाटी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुवाहाटी जोनल कार्यालय ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR), मालीगांव, गुवाहाटी के तत्कालीन डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (कंस्ट्रक्शन) स्वर्गीय रंजीत कुमार बोरा एवं अन्य के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच में करीब 3.50 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं।
कुर्क की गई संपत्तियों में बिहार के पटना स्थित एक आवासीय फ्लैट शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत 3.28 करोड़ रुपये है। यह फ्लैट सोनल जैन के नाम पर दर्ज है। इसके अलावा उनके नाम पर केनरा बैंक में रखी करीब 21.24 लाख रुपये की टर्म डिपॉजिट भी कुर्क की गई है।
ईडी ने यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), एसी-1, नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत रंजीत कुमार बोरा और अन्य पर रेलवे ठेकों के आवंटन एवं निष्पादन में निजी ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप लगाए गए थे।
सीबीआई ने 14 दिसंबर 2021 को रिश्वत की रकम की डिलीवरी के दौरान कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद वर्ष 2022 में मामले में आरोपपत्र भी दाखिल किया गया।
ईडी की जांच में सामने आया कि रंजीत कुमार बोरा ने रेलवे ठेकेदार फर्म मैसर्स सनशाइन के प्रोपराइटर चिंतन जैन और नयन चंद्र जैन से रिश्वत की रकम मांगी और स्वीकार की थी। जांच के अनुसार, रिश्वत से अर्जित रकम को आरोपियों के माध्यम से आगे निवेश किया गया। इस रकम का इस्तेमाल गुरुग्राम, हरियाणा स्थित प्लेटिनम टावर्स में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया गया था, जो मैसर्स सनशाइन के नाम पर खरीदा गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि उक्त फ्लैट को वर्ष 2024 में करीब 3.50 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। बिक्री से प्राप्त रकम को मैसर्स सनशाइन, चिंतन जैन और उनकी पत्नी सोनल जैन के बैंक खातों के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर स्थानांतरित किया गया। बाद में इस धनराशि का इस्तेमाल पटना स्थित आवासीय फ्लैट के लिए लिए गए होम लोन के भुगतान तथा सोनल जैन के नाम पर केनरा बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने में किया गया।
ईडी के अनुसार, वर्तमान में कुर्क की गई संपत्तियां स्वर्गीय रंजीत कुमार बोरा द्वारा कथित रूप से अर्जित अपराध से प्राप्त आय (Proceeds of Crime) के पुनर्निवेश और उसके वैध संपत्ति के रूप में एकीकरण को दर्शाती हैं।
रंजीत कुमार बोरा का 6 सितंबर 2024 को जांच लंबित रहने के दौरान निधन हो गया था। ईडी ने स्पष्ट किया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कुर्की की कार्यवाही संपत्ति के विरुद्ध होती है, इसलिए संबंधित संपत्तियों को वर्तमान धारक के कब्जे में होने के बावजूद कुर्क किया गया है।
