किशाऊ परियोजना समझौते पर छह राज्यों की सहमति, उत्तराखंड-हिमाचल की टोंस नदी पर बनेगा 232.6 मीटर ऊंचा बांध

किशाऊ परियोजना समझौते पर छह राज्यों की सहमति, उत्तराखंड-हिमाचल की टोंस नदी पर बनेगा 232.6 मीटर ऊंचा बांध
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे।

समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि किशाऊ परियोजना के पूरा होने के बाद यह देश के जल प्रबंधन और अंतरराज्यीय सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अध्याय साबित होगी। उन्होंने कहा कि परियोजना से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली किसी न किसी रूप में लाभान्वित होंगे। छह राज्यों की सहमति और समझौते पर हस्ताक्षर को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ तथा टीम भारत की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लंबे समय से लंबित जल विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से 2026 तक का कालखंड उत्तर भारत में जल विवादों के समाधान के दौर के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने लखवार बहुउद्देशीय परियोजना, शाहपुर कंडी बांध, रेणुकाजी बहुउद्देशीय बांध, केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित अन्य समझौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में यह दसवां जल विवाद समाप्त होने की दिशा में है।

उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है। परियोजना की लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय लागत केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि वर्ष 1994 के समझौते के अनुसार भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की वित्तीय कठिनाइयों को देखते हुए केंद्र सरकार की योजनाओं के माध्यम से राज्य की मांगों को समाहित करने और भविष्य में पड़ने वाले वित्तीय भार में सहयोग का प्रयास किया जाएगा।

किशाऊ परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा। इसमें 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल का भंडारण होगा। परियोजना से लगभग 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई तथा 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन होने की संभावना है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना से सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यमुना के जल बंटवारे के समय नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया था। परियोजना के माध्यम से यमुना में 25 प्रतिशत जल उपलब्ध होगा, जिससे दिल्ली के साथ-साथ यमुना के पर्यावरणीय संरक्षण को भी लाभ मिलेगा।

अमित शाह ने कहा कि यमुना की स्वच्छता और गंगा की स्वच्छता एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। यमुना प्रयागराज में गंगा में समाहित होती है, इसलिए यमुना को स्वच्छ किए बिना गंगा की स्वच्छता का लक्ष्य भी पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और संबंधित सभी पक्षों से यमुना शुद्धिकरण के प्रयासों को और गति देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना पर सहमति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘संवाद से समाधान’ के मंत्र की सफलता को दर्शाती है। सभी राज्यों ने एक दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता दिखाई है। परियोजना से करोड़ों लोगों को पेयजल, सिंचाई, विकास और औद्योगिक उपयोग के लिए जल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर केंद्रीय गृह सचिव, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग की सचिव तथा संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव सहित केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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