कैबिनेट में राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के लिए उपसमिति नहीं बनने पर आक्रोश, बड़े आंदोलन की चेतावनी

हरिद्वार। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के निस्तारण के लिए कैबिनेट में उपसमिति का गठन नहीं किए जाने पर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच ने नाराजगी जताई है।
मंच के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि हरिद्वार में आयोजित कैबिनेट बैठक में भी राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए उपसमिति गठित करने का विषय शामिल नहीं किया जाना आंदोलनकारियों की अनदेखी है।
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि पिछले राज्य स्थापना दिवस पर पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए घोषणा की थी। इस घोषणा को नौ माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, दो अक्टूबर को मुजफ्फरनगर गोलीकांड के शहीदों की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया था। इसके बावजूद अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आने से राज्य आंदोलनकारियों, मातृशक्ति और विभिन्न जिलों के आंदोलनकारियों में रोष व्याप्त है।
मंच के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण को लेकर दो बार शासनादेश जारी किए जाने के बावजूद अब तक किसी भी जिले में चिन्हीकरण की सूची जारी नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने की स्थिति में आंदोलनकारियों की समस्याएं और अधिक गंभीर हो गई हैं। शासनादेश जारी होने के बाद भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से आंदोलनकारियों में निराशा बढ़ रही है।
उन्होंने गृह सचिव शैलेश बगोली पर भी उपसमिति के गठन को लेकर पिछले तीन माह से लगातार आश्वासन दिए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से विशेषकर मातृशक्ति में भारी नाराजगी है।
प्रदेश प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि नवरात्र के तत्काल बाद राज्य आंदोलनकारियों की बैठक बुलाई जाएगी। बैठक में आगे की रणनीति तय कर सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल उपसमिति गठित कर चिन्हीकरण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।


