उत्तराखंड समानता पार्टी ने उत्तर प्रदेश वन संरक्षण अधिनियम 1976 को समाप्त करने तथा अन्य अधिनियमों में संशोधन हेतु वन मंत्री को ज्ञापन प्रस्तुत किया
देहरादून ।उत्तराखंड समानता पार्टी ने उत्तर प्रदेश वन संरक्षण अधिनियम 1976 को समाप्त करने तथा अन्य अधिनियमों में संशोधन हेतु मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया तथा वन मंत्री को ज्ञापन प्रस्तुत किया ।
वन अधिनियम के 4 अधिनियम जो उत्तराखंड राज्य बनने पर उत्तराखंड सरकार ने यथावत अंगीकार किये (1) उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976, (2) उत्तर प्रदेश प्राइवेट फारेस्ट एक्ट, (3)उत्तर प्रदेश संरक्षण अधिनियम 1972, (4) वन संरक्षण अधिनियम 1980 एवं भारतीय वन (उत्तरांचल संशोधन) अधिनियम 2001 सेंट्रल एक्ट राज्य बनने के बाद प्रभावी हुआ।
उक्त अधिनियमों से उत्तराखंड का विकास प्रभावित हुआ है। उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 उत्तराखंड के किसानों के लिए सबसे अहित कर है। इस एक्ट के बनाने के पीछे मुख्य कारण यह था कि उत्तर प्रदेश में मात्र 3% वन क्षेत्र है जो कि उत्तराखंड राज्य बनने के समय उत्तराखंड में 65% वन क्षेत्र था । इस अधिनियम के चलते हैं यहां का स्थानीय काश्तकार अपनी जोत की जमीन गांव रहा है, उनसे वह कोई आर्थिक लाभ नहीं ले पा रहा है। इससे उत्तराखंड का मूल निवासी वृक्षारोपण के प्रति विमुख हो रहा है एवं वनाग्नि लगने पर आग बुझाने में कोई व्यक्तिगत रुचि नहीं लेते। यदि यह अधिनियम समाप्त होता है तो कृषि भूमि लाभकारी सिद्ध होगी। इससे जहां एक और स्थानीय काश्तकारों को आर्थिक लाभ प्राप्त होगा के कारण रिवर्स पलायन होगा वहीं दूसरी ओर स्थानीय काश्तकार वृक्षारोपण के प्रति उत्साहित होंगे एवं वनाग्नि के समय आग बुझाने में अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझेंगे। भू माफिया जो कृषि भूमि खरीद कर पेडों काअबैध पातन कर प्लाटिंग करते हैं उनके लिए सरकार सख्त नियम बनाए तो पार्टी को कोई ऐतराज नहीं।
भारतीय वन (उत्तरांचल संशोधन अधिनियम 2001 निहायत एक मूर्खता पूर्ण अधिनियम है। इससे यहां के स्थानीय निवासियों का शोषण हो रहा है । गुजर समाज जो यहां के मूल निवासी भी नहीं है 1950 के बाद उत्तराखंड में उनका पदार्पण हुआ उन्हें जंगलों में समस्त क्रियाकलापों की खुली छूट देता है। और यहां के स्थानीय निवासियों के हक हकूकों को समाप्त कर उनका उत्पीड़न करता है, में संशोधन की आवश्यकता है।
ज्ञापन देने वालों में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीएस भंडारी, मुख्य महासचिव चंदन सिंह नेगी, चीफ कोऑर्डिनेटर एलपी रतूडी़, संगठन सचिव एसपी नैथानी, पार्टी प्रवक्ता अतुल चंद रमोला एवं संगठन सह सचिव त्रिलोक सिंह नेगी उपस्थित रहे।

