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न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद पत्रकार के खिलाफ मानहानि व आईटी एक्ट में चलेगा मुकदमा

न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद पत्रकार  के खिलाफ मानहानि व आईटी एक्ट में चलेगा  मुकदमा
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चकराता। न्यायिक मजिस्ट्रेट चकराता, जिला देहरादून की अदालत ने वरिष्ठ उपनिरीक्षक कृष्ण कुमार सिंह की ओर से दायर फौजदारी परिवाद संख्या 12/2026 में सोशल मीडिया पर कथित रूप से आपत्तिजनक एवं मानहानिकारक पोस्ट प्रसारित करने के मामले में प्रस्तावित अभियुक्त पत्रकार  के विरुद्ध प्रथम दृष्टया अपराध बनना पाया है। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 356(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) के तहत मामले का संज्ञान लेते हुए उन्हें विचारण के लिए न्यायालय के समक्ष आहूत किया है।

परिवाद के अनुसार, 29 मार्च 2026 को सोशल मीडिया पर “वर्दी पर दाग, दरोगा कृष्ण कुमार सिंह निलंबित” शीर्षक से एक पोस्ट प्रसारित की गई थी। पोस्ट के साथ कृष्ण कुमार सिंह की पुलिस वर्दी में एक फोटो भी लगाई गई थी। परिवादी का आरोप था कि उक्त फोटो उनके निजी सोशल मीडिया अकाउंट से ली गई और निलंबन संबंधी खबर के साथ इस तरह प्रस्तुत की गई, जिससे उनकी सामाजिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

परिवादी ने अदालत को बताया कि उनका 28 मार्च 2026 को अस्थायी निलंबन हुआ था, लेकिन तथ्यों की समीक्षा के बाद 2 अप्रैल 2026 को उन्हें पुनः बहाल कर दिया गया। उनका आरोप था कि इसके बावजूद संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट और फोटो को हटाया नहीं गया तथा पोस्ट के माध्यम से उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया।

मामले में परिवादी की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट, संबंधित नोटिस और उसके जवाब सहित विभिन्न दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। परिवादी ने यह भी आरोप लगाया कि अभियुक्त से पूर्व में व्यक्तिगत रंजिश थी और एक पुराने आपराधिक मुकदमे में कृष्ण कुमार सिंह विवेचक थे, जिसमें पत्रकार नामजद अभियुक्त था।

अदालत ने आदेश में कहा कि इस स्तर पर पूरे साक्ष्य का सूक्ष्म विश्लेषण करना आवश्यक नहीं है, बल्कि यह देखना है कि परिवाद और उसके समर्थन में प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य से प्रथम दृष्टया अपराध का गठन होता है या नहीं तथा अभियुक्त को विचारण के लिए बुलाने का पर्याप्त आधार मौजूद है या नहीं।

अदालत ने उपलब्ध सामग्री के अवलोकन के बाद पत्रकार के विरुद्ध प्रथम दृष्टया धारा 356(2) बीएनएस और धारा 66(सी) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला बनने का आधार माना। अदालत ने उन्हें विचारण के लिए आहूत करने का आदेश दिया है।

न्यायालय ने परिवादी को गवाहों की सूची और आवश्यक आदेशिका शुल्क आदि दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद अभियुक्त के विरुद्ध उपस्थिति हेतु समन जारी किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

देवभूमि खबर

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