स्ट्रीट लाइट बिजली बिल का बोझ जनता पर डालने के विरोध में उतरे नागरिक, संयुक्त नागरिक संगठन ने जताया आक्रोश
देहरादून। संयुक्त नागरिक संगठन की पहल पर आयोजित जनसंवाद में शहर की स्ट्रीट लाइटों के लगभग 9 करोड़ रुपये के बकाया बिजली बिलों की वसूली आम विद्युत उपभोक्ताओं से किए जाने के प्रयासों का विरोध किया गया। नागरिकों ने इसे उपभोक्ताओं के अधिकारों पर आघात बताते हुए “जजिया कर” की संज्ञा दी।
वक्ताओं ने कहा कि स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव और बिजली बिलों के भुगतान की जिम्मेदारी पूरी तरह नगर निकायों की है और इसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता। उनका कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार उपभोक्ता केवल अपनी खपत की गई बिजली का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार होता है।
जनसंवाद में यह भी सवाल उठाया गया कि नगर निगम को पिछले वर्ष हाउस टैक्स समेत विभिन्न स्रोतों से लगभग 60 करोड़ रुपये की आय होने के बावजूद यूपीसीएल का 9 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान अब तक क्यों नहीं किया गया। वक्ताओं ने मेयर और पार्षदों से भी नगर निगम की वित्तीय स्थिति सुधारने में सक्रिय भूमिका निभाने की मांग की।
नागरिकों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से वर्ष 2026-27 के बजट में शहरी निकायों के लिए अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये का अनुदान देने की मांग की। साथ ही सुझाव दिया गया कि प्रदेश की 582 बस्तियों, जिनमें देहरादून की 129 बस्तियों के लगभग 50 हजार घर शामिल हैं, से हाउस टैक्स वसूली कर निकायों की आय बढ़ाई जाए ताकि स्ट्रीट लाइटों के बिलों का नियमित भुगतान संभव हो सके।
संवाद में वक्ताओं ने टिहरी बांध से 2400 मेगावाट बिजली उत्पादन के बावजूद उत्तराखंड को सस्ती बिजली उपलब्ध न होने को जनता के साथ अन्याय बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रस्तावित 1000 मेगावाट पंप स्टोरेज परियोजना के लोकार्पण के दौरान राज्य को राहत देने संबंधी घोषणा की अपेक्षा जताई।
कार्यक्रम का संचालन सुशील त्यागी ने किया। जनसंवाद में अर्जुन कोहली, पद्मेंद्र सिंह बर्थवाल, खुशवीर सिंह, राजीव शर्मा खनसाली, अमर सिंह धुनता, यज्ञ भूषण शर्मा, ब्रिगेडियर केजी बहल, लेफ्टिनेंट कर्नल बीएम थापा, दिनेश भंडारी, गिरीश चंद्र भट्ट, ठाकुर शेर सिंह, डॉ. राकेश डंगवाल, नरेश चंद्र कुलाश्री, अवधेश शर्मा, ताराचंद गुप्ता और प्रिंस कपूर सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

